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जानिए वैशाख महीने के अलावा अन्य महीनों में किन फूलों से करें भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न

Thu, 29 Apr 2021 11:49 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन, वास्तुविद, नई दिल्ली
अनीता जैन, वास्तुविद, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 29 Apr 2021 11:49 AM IST
सार

  • वैशाख के महीने में भगवान विष्णु की सुगन्धित फूलों से पूजा करना बहुत पुण्यदायी है।

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vaishakh month 2021 started know importance of vaishakh month
हिंदी पंचांग के अनुसार 28 अप्रैल से पावन वैशाख माह लग चुका है।

विस्तार

हिंदी पंचांग के अनुसार 28 अप्रैल से पावन वैशाख माह लग चुका है। इस मास का महत्व बताते हुए नारदजी ने कहा है कि परमपिता ब्रह्माजी ने इस माह को सभी महीनों में श्रेष्ठ बताया है। मान्यता है कि इस महीने में पवित्र नदियों में स्न्नान और श्रीकृष्ण जी या उनके किसी भी अवतार की पूजा-सेवा करने से व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट होकर सुख-सौभाग्य मिलता है। इस महीने में जप, तप, ध्यान करना शीघ्र फलदाई माना गया है। वैशाख के महीने में भगवान विष्णु की सुगन्धित फूलों से पूजा करना बहुत पुण्यदायी है। वैसे तो भगवान श्रीकृष्ण या उनके किसी भी स्वरुप की पूजा में कभी भी कोई भी पुष्प अर्पित किया जा सकता है लेकिन पदम् पुराण के अनुसार किस मास में किन-किन फूलों का भगवान की पूजा में उपयोग करना अधिक फलदाई है।

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चैत्र, वैशाख और ज्येष्ठ
चैत्र मास में चंपा, चमेली, दौना, कटसरैया और वरुण वृक्ष के फूलों से भी जगत के स्वामी सर्वेश्वर श्रीविष्णु का पूजन किया जा सकता है। मनुष्य को एकाग्रचित्त होकर लाल या किसी भी रंग के सुंदर कमल पुष्पों से श्री हरि का पूजन करना विशेष फलदाई है। वैशाख मास में केवड़े के पत्ते, मोगरा के पुष्प लेकर महाप्रभु श्री विष्णु का पूजन करना चाहिए। ज्येष्ठ मास आने पर ऋतु के अनुसार अथवा नाना प्रकार के फूलों से भगवान की पूजा करनी चाहिए। जिन्होंने भक्तिपूर्वक भगवान का पूजन कर लिया उनसे श्री हरि संतुष्ट रहते हैं।

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आषाढ़, सावन और भाद्रपद
आषाढ़ मास में कनेर के फूल, लाल रंग केपुष्प अथवा कमल के फूलों से भगवान की विशेष पूजा करनी चाहिए। जो सुवर्ण के समान रंग वाले कदम के फूलों से सर्वव्यापी गोविन्द की इस माह में पूजा करते है,उन्हें कभी यमराज का भय नहीं होगा। तुलसी, श्यामा तुलसी तथा अशोक के द्वारा सर्वदा पूजित होने पर श्री विष्णु नित्यप्रति कष्ट का निवारण करते हैं। जो लोग सावन आने पर अलसी या दूर्वा दल के द्वारा श्री जनार्दन की पूजा करते हैं,उन्हें भगवान प्रलयकाल तक मनोवांछित भोग प्रदान करते हैं। भादों के महीने में चंपा, श्वेत पुष्प तथा पीले और लाल रंगों के पुष्पों से पूजन करके सब कामनाओं का फल प्राप्त कर लेता है।

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आश्विन, कार्तिक और मार्गशीर्ष
आश्विन के शुभ मास में जूही, चमेली, कमल तथा नाना प्रकार के शुभ पुष्पों द्वारा श्रीहरि का पूजन करना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य इस पृथ्वी पर धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पदार्थ प्राप्त कर लेता है। कार्तिक मास आने पर परमेश्वर श्री विष्णु की पूजा तिल अथवा उस समय के जितने भी ऋतु के अनुकूल पुष्प हैं वे सभी माधव को अर्पण करने चाहिए। मार्गशीर्ष मास जो कि श्रीकृष्ण का ही स्वरुप है, इसमें नाना प्रकार के पुष्पों, उत्तम नैवेद्यों, धूपों तथा आरती आदि के द्वारा प्रसन्नता पूर्वक श्री जनार्दन का पूजन करके सभी सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।

पौष, माघ और फाल्गुन
पौष माह में सभी प्रकार के तुलसी दल एवं पुष्पों से पूजन करना कल्याणदायक माना गया है।इसी प्रकार माघ मास आने पर पीले रंग जैसे सरसों,गेंदा एवं सभी रंगों के पुष्पों को भगवान की सेवा में अर्पित करें।फाल्गुन में भी पीले रंग के सभी पुष्प एवं नवीन पुष्पों अथवा सब प्रकार के फूलों से श्री हरि का अर्चन करना चाहिए।इस प्रकार श्री जगन्नाथ के पूजित होने पर व्यक्ति श्री विष्णु की कृपा से अविनाशी वैकुण्ठ को प्राप्त कर लेता है।  
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