Surya Grahan 2020: कैसे लगता है सूर्य ग्रहण, क्या हैं इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं
आज इस साल का आखिरी सूर्य ग्रहण लगेगा। यह सूर्य ग्रहण शाम 7 बजकर 3 मिनट से प्रारंभ होगा और रात 12 बजकर 23 मिनट पर समाप्त होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ग्रहण का लगना अशुभ माना जाता है। वैज्ञानिक, धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से सूर्य ग्रहण का महत्व बहुत अधिक है। आइए जानते हैं सूर्य ग्रहण के बारे में विस्तार से-
सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है। वैज्ञानिक परिभाषा के अनुसार, जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा तीनों एक सीध में रहते हैं और पृथ्वी और सूर्य के बीच में चंद्रमा आ जाता है। इससे सूर्य की आंशिक या पूर्ण रोशनी धरती पर नहीं आ पाती है और इसी घटना को सूर्यग्रहण कहते हैं।
पौराणिक मान्यता के अनुसार जब समुद्र मंथन चल रहा था तब उस दौरान देवताओं और दानवों के बीच अमृत पान के लिए विवाद पैदा शुरू होने लगा, तो इसको सुलझाने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया। मोहिनी के रूप से सभी देवता और दानव उन पर मोहित हो उठे तब भगवान विष्णु ने देवताओं और दानवों को अलग-अलग बिठा दिया। लेकिन तभी एक असुर को भगवान विष्णु की इस चाल पर शक पैदा हुआ। वह असुर छल से देवताओं की लाइन में आकर बैठ गए और अमृत पान करने लगा।
देवताओं की पंक्ति में बैठे चंद्रमा और सूर्य ने इस दानव को ऐसा करते हुए देख लिया। इस बात की जानकारी उन्होंने भगवान विष्णु को दी, जिसके बाद भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से दानव का सिर धड़ से अलग कर दिया। लेकिन उस दानव ने अमृत को गले तक उतार लिया था, जिसके कारण उसकी मृत्यु नहीं हुई और उसके सिर वाला भाग राहु और धड़ वाला भाग केतु के नाम से जाना गया। इसी वजह से राहु और केतु सूर्य और चंद्रमा को अपना शत्रु मानते हैं। इसलिए राहु-केतु सूर्य और चंद्रमा का ग्रास कर लेते हैं। इस स्थिति को ग्रहण कहा जाता है।
ज्योतिष में राहु और केतु को छाया ग्रह माना जाता है। इन दोनों ग्रहों का कोई वास्तविक आकार नहीं है और दोनों ग्रह किसी भी राशि के स्वामी भी नहीं है। लेकिन फिर भी ये दोनों ग्रह ज्योतिषीय गणना में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। अगर किसी की कुंडली में राहु-केतु की स्थिति ठीक न हो तो उसको जीवन में बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इनकी ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सूर्य और चंद्रमा भी इसके प्रभाव से नहीं बच पाते हैं।