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क्या वाकई रावण ने कौशल्या को मारना चाहा?
राकेश/इंटरनेट डेस्क
Updated Mon, 15 Jul 2013 04:07 PM IST
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बीते सप्ताह छोटे परदे पर 'देवों के देव महादेव' में एक अजीबोगरीब प्रसंग दिखाया गया। इसमें रावण द्वारा कौशल्या को मरने का प्रयास जाता है।
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अगर आपने भी इस प्रसंग को देखा है तो आपको याद होगा कि रावण को पता चलता है कि दशरथ की पत्नी कौशल्या के गर्भ से श्री राम का जन्म होगा और राम ही उसकी मृत्यु का कारण बनेंगे।
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रावण सोचता है कि अगर कौशल्या ही नहीं रहेगी तो राम का जन्म कैसे होगा। यह विचार करके रावण कौशल्या के मारने की योजना बनाता है।
दर्शकों के भ्रमित कर रहा है 'देवों का देव महादेव'
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ऋषि आश्रम में जहां राजा दशरथ पुत्रेष्ठी यज्ञ करवा रहे होते हैं उस आश्रम के मार्ग में रावण माली का वेष बनाकर बैठ जाता है। कौशल्या जब पूजा के लिए मार्ग से गुजरती है तो रावण कौशल्या से फूल लेने का आग्रह करता है।
कौशल्या रावण से प्राप्त फूल को सूंघते ही अचेत हो जाती है। मौका देखकर रावण एक बक्से में कौशल्या को बंद कर देता है और एक ऊंचे स्थान से बक्से को नदी में फेंक देता है।
रावण के जाने के बाद गणेश जी प्रकट होते हैं और कौशल्या को बचा लेते हैं। इस प्रसंग को देखकर आपको आश्चर्य भी हुआ होगा क्योंकि इस प्रसंग का वर्णन आपने शायद कभी सुना भी न हो।
असल में रामायण का मूल आधार बाल्मिकी रामायण और तुलसीदास द्वारा लिखी हुई रामचरित मानस है। पुराण और धार्मिक विषयों के जानकार पण्डित जयगोविंद शास्त्री बताते हैं कि रावण द्वारा कौशल्या को मारने की घटना का वर्णन न तो बाल्मिकी ने किया है और न तुलसीदास जी ने।
रावण एक ज्ञानी व्यक्ति था, उसे इस बात की जानकारी थी कि राम के हाथों उसे मुक्ति मिलेगी। इसलिए वह राम के आने का इंतजार कर रहा था। सीता हरण के पीछे भी उसकी यही मंशा थी कि राम उसका वध करें। इसलिए रावण का अपनी मृत्यु के भय से कौशल्या को मारने का प्रयास करना किसी भी तरह तर्कसंगत नहीं दिखता।
असल में दक्षिण भारत में कई ऐसी किंवदंतियों पर आधारित रामायण हैं जिसका कोई आधार नहीं है। व्यावसायिक लाभ के लिए समय-समय इस तरह के प्रसंगों को फिल्माया जाता रहा है। कौशल्या को मारने के प्रयास की जो घटना उक्त सीरियल में दिखाई गई, वह भी ऐसी ही किंवदंतियों पर आधारित है।