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Pradosh Vrat: कल है शुक्र प्रदोष व्रत, पढ़िए पूरी व्रत कथा

Thu, 26 Nov 2020 04:14 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Thu, 26 Nov 2020 04:14 PM IST
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shukra pradosh vrat date significance and vrat katha
pradosh vrat 2020: सप्ताह के जिस दिन प्रदोष व्रत होता है उसी के नाम पर प्रदोष व्रत का नाम रखा जाता है - फोटो : अमर उजाला

हर माह की त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव का व्रत किया जाता है। इस व्रत को प्रदोष व्रत कहते हैं। इस बार प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन पड़ने के कारण शुक्र प्रदोष कहलाएगा। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन विधि-विधान से व्रत करने और शिव जी का पूजन करने से सभी प्रकार की कलह समाप्त होती है। मनुष्य को किसी प्रकार के रोग-दोष का भय नहीं रहता है। प्रदोष व्रत का पूजन प्रदोष काल में किया जाता है। संध्या के समय सूर्यास्त से लगभग 1 घंटे पूर्व पूजन आरंभ कर दिया जाता है। इस बार यह व्रत शुक्रवार को पड़ने के कारण सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला होगा। प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा करने के पश्चात कथा भी पढ़नी चाहिए। जानते हैं शुक्र प्रदोष व्रत की कथा

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शुक्र प्रदोष व्रत की कथा के अनुसार एक नगर में 3 मित्र राजकुमार, ब्राह्मण कुमार और धनिक पुत्र रहते थे। राजकुमार और ब्राह्मण कुमार दोनों विवाहित थे। कुछ समय बाद धनिक पुत्र का भी विवाह हो गया, लेकिन गौना शेष था, इसलिए धनिक पुत्र की पत्नी अपने मायके में ही थी। एक दिन तीनों मित्र स्त्रियों की चर्चा कर रहे थे। तभी ब्राह्मण कुमार ने स्त्रियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ''नारीहीन घर भूतों का डेरा'' होता है। धनिक पुत्र ने यह सुना तो तुरंत ही उसने अपनी पत्नी को घर लाने का निश्चय कर लिया। धनिक पुत्र को उसके माता-पिता ने समझाया कि अभी शुक्र देवता डूबे हुए हैं। ऐसे में बहू-बेटियों को उनके घर से विदा करवाकर लाना शुभ नहीं माना जाता, लेकिन धनिक पुत्र ने एक नहीं सुनी और ससुराल पहुंच गया।

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ससुराल में जाने पर भी सभी ने धनिक पुत्र को समझाने का प्रयास किया परंतु वह विदा कराने की जिद पर अड़ा रहा। धनिक पुत्र की हठ के कारण कन्या के माता-पिता को विदाई करनी पड़ी। विदाई कराने के पश्चात पति-पत्नी शहर से निकले ही थे कि बैलगाड़ी का पहिया निकल गया और बैल की टांग टूट गई। दोनों को चोट लगी लेकिन फिर भी वो चलते रहे। अभी कुछ ही दूरी पर पहुंचे थे कि उन्हें रास्ते में डाकू मिल गए। डाकूओं ने उनका सारा धन लूट लिया। जैसे ही दोनों घर पहुंचे, धनिक पुत्र को सांप ने डंस लिया। तुरंत ही उसके पिता ने वैद्य को बुलाया तो वैद्य ने उसे देखने के बाद बताया कि वो 3 दिन में इसकी मृत्यु हो जाएगी।
जब धनिक पुत्र के मित्र ब्राह्मण कुमार को यह खबर मिली तो वो धनिक पुत्र के घर पहुंचा और उसके माता-पिता को शुक्र प्रदोष व्रत करने के बारे में बताया और उनसे कहा कि इसे पत्नी सहित वापस ससुराल भेज दें। धनिक ने ब्राह्मण कुमार की बात मानकर पत्नी सहित ससुराल चला गया। वहां पर उसकी हालत ठीक होती गई यानी शुक्र प्रदोष के माहात्म्य से सभी कष्ट दूर हो गए। 
शुक्र प्रदोष के दिन यह कथा अवश्य पढ़नी या सुननी चाहिए। 
 
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