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जब पहली बार खुला भगवान शिव का तीसरा नेत्र
राकेश झा/ अमर उजाला, दिल्ली।
Updated Fri, 14 Mar 2014 02:48 PM IST
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पुराणों में बताया गया है कि भगवन शिव के तीन नेत्र हैं। भगवान भोले नाथ अपने तीसरे नेत्र को हमेशा बंद किए रहते हैं। और जब यह नेत्र खुलता है तो प्रलय की स्थिति आ जाती है।
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ऐसी मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ ने अपने तीसरे नेत्र को पहली बार फाल्गुन पूर्णिमा यानी होली के दिन खोला था। शिव के नेत्र खुलते ही प्रेम के देवता कामदेव जलकर भष्म हो गए।
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शिव के क्रोध से संसार जलने लगा। तब कामदेव की पत्नी रति ने भगवान शिव के चरण पकड़ लिए। इससे शिव का क्रोध शांत हुआ और जिस उद्देश्य को पूरा करने के लिए कामदेव भष्म हुए वह काम पूरा हुआ। यानी भगवान शिव ने पार्वती से विवाह करना स्वीकार किया।
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