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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Sharad Purnima 2022 Date Auspicious Yogas Importance And Remedies are Best On This Day

Sharad Purnima 2022: 9 अक्तूबर को शुभ योग में शरद पूर्णिमा और 3 ग्रह अपनी राशि में होंगे, जानें महत्व और उपाय

Thu, 06 Oct 2022 10:39 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 06 Oct 2022 10:39 AM IST
सार

इस साल 09 अक्तूबर को मनाई जाने वाली शरद पूर्णिमा पर गुरु अपनी राशि यानी मीन में रहते हुए चंद्रमा के साथ युति बनाएंगे। इस युति से गजकेसरी नाम का शुभ योग बनेगा। शास्त्रों में गजकेसरी योग को बहुत ही शुभ माना गया है।

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Sharad Purnima 2022 Date Auspicious Yogas Importance And Remedies are Best On This Day
SHARAD PURNIMA 2022: अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को कोजोगार पूर्णिमा,रास पूर्णिमा या शरद पूर्णिमा कहा जाता है। इस बार यह पूर्णिमा 09 अक्टूबर को मनाई जाएगी। - फोटो : istock

विस्तार

Sharad Purnima 2022 Date Importance: हिंदू पंचांग के अनुसार हर एक माह में 15-15 दिन के दो पक्ष होते हैं एक शुक्ल पक्ष और दूसरा कृष्ण पक्ष और इसी में पूर्णिमा तिथि आती है। अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा और कोजागरी पूर्णिमा कहते हैं। यह सभी पूर्णिमा में विशेष स्थान रखती है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इस तिथि पर देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं और घर-घर भ्रमण करती हैं। इस रात को जो कोई जागते हुए मां लक्ष्मी की पूजा-आराधना करता है उन पर मां लक्ष्मी प्रसन्न हो जाती हैं। मां लक्ष्मी उस व्यक्ति के घर पर वास करने लगती हैं। इसके अलावा शरद पूर्णिमा की रात को चांद अपनी सभी सोलह कलाओं में होता है और उससे निकलनी वाली किरणें अमृत सामान होती है। शरद पूर्णिमा पर खुले आकाश के नीचे रात भर खीर रखा जाता है। मान्यता है कि चांद की अमृत रूपी किरणें जब खीर में पड़ती है वह अमृत बन जाती है। इस बार शरद पूर्णिमा पर कई विशेष शुभ योग बन रहा है जिससे कारण यह बहुत खास बन गया है। 

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शरद पूर्णिमा पर ग्रहों की स्थिति
इस साल 09 अक्तूबर को मनाई जाने वाली शरद पूर्णिमा पर गुरु अपनी राशि यानी मीन में रहते हुए चंद्रमा के साथ युति बनाएंगे। इस युति से गजकेसरी नाम का शुभ योग बनेगा। शास्त्रों में गजकेसरी योग को बहुत ही शुभ माना गया है। इसके अलावा बुध ग्रह अपनी ही राशि में रहते हुए सूर्य के साथ युति बनाएंगे जिसे बुधादित्य योग कहा जाता है। शरद पूर्णिमा पर गजकेसरी और बुधादित्य योग के साथ इस दिन शनि भी अपनी स्वराशि में रहेंगे। इसके अलावा अन्य तरह के कई योग भी बनेंगे जिसमें शश योग, सर्वार्थसिद्धि योग, ध्रुव और स्थिर योग होगा। वर्षों बाद शरद पूर्णिमा पर इस तरह के ग्रहों के संयोग के कारण शुभ खरीदारी और शुभ कार्य करने पर शुभ फलदायी रहने वाला होगा।
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Sharad Purnima 2022: इस साल कब है शरद पूर्णिमा? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
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शरद पूर्णिमा का महत्व 
अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को कोजोगार पूर्णिमा,रास पूर्णिमा या शरद पूर्णिमा कहा जाता है। इस बार यह पूर्णिमा 09 अक्टूबर को मनाई जाएगी। धर्मग्रंथों के अनुसार कुछ रातों का बहुत महत्व है जिसमें शरद पूर्णिमा भी शामिल है। इसी दिन से पुण्य प्रदाता कार्तिक मास के यम नियम,व्रत ,स्न्नान और दीपदान का आरम्भ हो जाता हैं। शरद पूर्णिमा से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक नित्य प्रति संध्या के समय तुलसी और खुले आकाश के नीचे दीपदान करने से दुःख,दरिद्र का नाश होता हैं।


पृथ्वी पर आती हैं मां लक्ष्मी
ज्योतिष मान्यता के अनुसार जो भक्त इस रात लक्ष्मी जी की षोडशोपचार विधि से पूजा करके श्री सूक्त का पाठ,कनकधारा स्त्रोत,विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करते है उनकी कुण्डली में धनयोग नहीं भी होने पर माता उन्हें धन-धान्य से संपन्न कर देती हैं। नारद पुराण के अनुसार शरद पूर्णिमा की श्वेत धवल चांदनी में विष्णुप्रिया माता लक्ष्मी अपने वाहन उल्लू पर सवार होकर अपने कर-कमलों में वर और अभय लिए निशीथ काल में  पृथ्वी पर भ्रमण करती  हैं और माता यह भी देखती है- कि कौन जाग रहा है? यानि अपने कर्मों को लेकर कौन-कौन सचेत हैं। जो जन इस रात में जागकर माँ लक्ष्मी की उपासना करते है माँ लक्ष्मी की उन पर असीम कृपा होती है,प्रतिवर्ष किया जाने वाला कौमुदी व्रत लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने वाला है।

शरद पूर्णिमा पर क्या करें
- शरद पूर्णिमा की रात को घर की छत पर खीर बनाकर रखें। शरद पूर्णिमा पर चांद की किरणें खीर में पड़ने से यह औषधि के रूप में लाभ पहुंचाती है।
- शरद पूर्णिमा की रात को कुछ देर चांद की चांदनी में बैठना चाहिए।
- शरद पूर्णिमा की रात को हनुमानजी की पूजा और उनके सामने चौमुखा दीपक जलाएं।
- शरद पूर्णिमा की रात में जागते हुए मां लक्ष्मी, भगवान शिव,कुबेर और चंद्रदेव की आराधना करनी चाहिए। मान्यता है इस दिन मां लक्ष्मी से जुड़े मंत्रों का जाप करने पर मां लक्ष्मी और कुबेर देव की कृपा मिलती है।

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