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Shani Jayanti 2021: आखिर क्यों चढ़ाया जाता है शनिदेव पर तेल, जानें क्या कहती हैं कथाएं ?
Thu, 10 Jun 2021 07:11 AM IST
विनोद शुक्ला
अनीता जैन, वास्तुविद, नई दिल्ली
अनीता जैन, वास्तुविद, नई दिल्ली
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 10 Jun 2021 07:11 AM IST
सार
शनि जयंती या शनिवार के दिन इनकी मूर्ति पर तेल चढ़ाया जाता है,जिससे ये शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
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शनि जयंती 2021: शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए उन्हें तेल चढ़ाया जाता है।
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विस्तार
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ महीने की अमावस्या के दिन भगवान शनिदेव का जन्म हुआ था। पिता सूर्य और माता छाया के पुत्र शनि का नवग्रहों में बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। धीमी गति से चलने वाले शनिदेव किसी एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं। शनि को कर्म फलदाता कहा जाता है एवं ये व्यक्ति के कर्मों के हिसाब से फल देते हैं। शनि जयंती या शनिवार के दिन इनकी मूर्ति पर तेल चढ़ाया जाता है,जिससे ये शीघ्र प्रसन्न होते हैं। आइए जानते हैं आखिर क्यों चढ़ाया जाता है शनिदेव पर तेल...
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पहली कथा
शास्त्रों के अनुसार एक समय सूर्यपुत्र शनिदेव को अपने बल और पराक्रम पर बड़ा अहंकार हो गया था और वे खुद को सबसे अधिक बलशाली समझने लगे। इसी घमंड में शनि देव ने हनुमानजी से युद्ध करने की सोची। शनि देव हनुमान जी को पराजित कर ये साबित करना चाहते थे कि उनसे अधिक शक्तिशाली तीनों लोकों में कोई नहीं है। जब शनि देव, श्री रामदूत हनुमानजी के पास गए तो हनुमानजी एक शांत स्थान पर बैठकर अपने प्रभु श्रीराम की भक्ति में लीन थे। शनिदेव हनुमान जी से मिलते ही उनको युद्ध करने के लिए ललकारने लगे। रामजी के परम भक्त हनुमानजी ने शनिदेव को बहुत समझाया और युद्ध के लिए तैयार नहीं हुए। लेकिन शनिदेव तो अहंकार के मद में चूर थे उन्होंने हनुमान जी की एक न सुनी और युद्ध करने की ठान ली। बजरंगबली के कई बार मना करने पर भी शनिदेव नहीं माने तो पवन पुत्र हनुमानजी और शनिदेव के बीच घमासान युद्ध शुरू हो गया। लड़ते-लड़ते शनिदेव बुरी तरह हारकर घायल हो गए और उनके शरीर में भयंकर पीड़ा होने लगी। तब हनुमान जी उनकी पीड़ा को तेल लगाकर कम किया। तब से ही शनिदेव पर तेल चढ़ाया जाता है। शनिदेव ने हनुमानजी को वचन दिया कि में आपके भक्तों को कभी तंग नहीं करूंगा व जो भी व्यक्ति मुझे सच्चे मन से तेल चढ़ाएगा, मैं उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी करूंगा।
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दूसरी कथा
रामायण काल की बात है, कि रावण ने अपने पराक्रम के बल से सभी ग्रहों को बंदी बना लिया था। शनिदेव को भी अहंकारी रावण ने अपने बाहुबल के नशे में चूर होकर बंदीग्रह में उल्टा लटका दिया। जब हनुमानजी माता सीता की खोज में अपने स्वामी प्रभु श्री राम के दूत बनकर लंका गए हुए थे। रावण ने जब हनुमाजी की पूंछ में आग लगाई तब हनुमानजी ने पूरी लंका में आग लगा दी। विभीषण का महल छोड़कर पूरी लंका के जलने से सारे ग्रह आजाद हो गए परंतु शनिदेव उल्टे ही लटके हुए थे जिस कारण शनि देव आजाद नहीं हो पाए और उल्टा लटके होने के कारण उनके शरीर में बहुत भयंकर दर्द हो रहा था और वह दर्द की पीड़ा से परेशान हो रहे थे। शनिदेव की इस पीड़ा को कम करने के लिए मारुती नंदन ने उनके शरीर पर तेल से मालिश की,जिससे शनि पीड़ा मुक्त हुए। तब शनिदेव ने कहा कि जो भक्त श्रद्धा से मुझ पर तेल चढ़ाएगा उसे जीवन के सारे दुखों से मुक्ति मिल जाएगी। मान्यता है कि शनिदेव पर तेल चढ़ाने की परंपरा तब से ही प्रारंभ हुई
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