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दोहरा लाभ देने आई सावन मास की यह एकादशी

Tue, 22 Jul 2014 05:06 PM IST
Updated Tue, 22 Jul 2014 05:06 PM IST
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sawan kamda or kamika ekadashi vrat katha

सावन का महीना भगवान भोलेनाथ का महीना है। इस मास में किए गए जप, तप, व्रत ध्यान का फल भगवान शिव देते हैं। इस पर अच्छा संयोग यह है कि मंगलवार 22 जुलाई को कामिका एकादशी है।

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इसे कामदा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। यह एकादशी ऐसे दिन में है जो देवी पार्वती का प्रिय सावन के मंगलवार को है। शास्त्रों में इस मंगलवार को मंगलागौरी का दिन कहा गया है।
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ऐसे में कामिका एकादशी का व्रत रखने वाले को भगवान विष्णु, शिव और देवी पार्वती के व्रत का पुण्य मिल सकता है।

कामिका एकादशी व्रत करने का लाभ

sawan kamda or kamika ekadashi vrat katha

शास्त्र और पुराणों में कामिका एकादशी का बड़ा ही पुण्य बताया गया है। पद्पुराण कहता है जो व्यक्ति सावन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत करता है उसे संपूर्ण पृथ्वी दान करने का पुण्य प्राप्त होता है।

भगवान श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा है कि जो फल वाजपेय यज्ञ करने से प्राप्त होता है वही फल कामिका एकादशी का व्रत करने से प्राप्त होता है।

कामिका एकादशी के विषय में कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा अर्चना में मन लगाता है उसके सभी पाप कट जाते हैं और व्यक्ति उत्तम लोक में स्थान प्राप्त करने का अधिकारी बन जाता है।

कामिका एकादशी व्रत पूजा के नियम

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इस एकादशी का व्रत रखने वाले के लिए नियम है कि दशमी के दिन शुद्घ आहार ग्रहण करें। सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करे। एकादशी के दिन प्रातः काल स्नानादि से पवित्र होने के बाद संकल्प करके भगवान विष्णु के विग्रह की पूज करें। भगवान विष्णु को फूल, फल, तिल, दूध, पंचामृत आदि नाना पदार्थ अर्पित करें।

शास्त्र में कहा गया है कि एकादशी के दिन भगवान विष्णु को तुलसी का पत्ता चढ़ाएं तथा भगवान के सामने घी अथवा तिल का दीपक जलाएं। जो व्यक्ति ऐसा करता है उसके पितृगण पितर लोक में आनंद मनाते हैं और उनकी सद्गगति होती है। ऐसा व्यक्ति मृत्यु के बाद उत्तम लोक में जाता है। कामिका एकादशी में पके हुए फलों का सेवन करना वर्जित माना गया है।

व्रत का सामान्य तरीका
जिनके लिए यह नियम पालन करना कठिन हो वह एकादशी के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करें और अपना काम करते हुए भगवान का ध्यान करें।

रात में विष्णु सहस्रनाम का पाठ करके अगले दिन किसी ब्राह्मण को भोजन करवाने के बाद स्वयं भोजन करें।


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कामिका एकादशी की कथा

sawan kamda or kamika ekadashi vrat katha

प्राचीन काल में एक गांव में एक ठाकुर जी रहते थे। ठाकुर जी का एक ब्राह्मण से झगड़ा हो गया और क्रोध में आकर ठाकुर ने ब्राह्मण की हत्या कर दी। बाद में उसे अपने किए पर पछतावा होने लगा। अपराध की क्षमा याचना के लिए ठाकुर ने ब्राह्मण का क्रिया कर्म करना चाहा।

परन्तु पंडितों ने क्रिया कर्म में शामिल होने से मना कर दिया और वह ब्रह्म हत्या का दोषी बन गया। तब ठाकुर ने एक मुनि से निवेदन किया कि हे भगवान, मेरा पाप कैसे दूर हो सकता है।

इस पर मुनि ने उसे कामिका एकादशी व्रत करने की सलाह दी। ठाकुर ने नियम पूर्वक एकादशी का व्रत किया। रात में भगवान की मूर्ति के पास जब वह सो रहा था, तभी उसे सपने में भगवान के दर्शन हुए। भगवान ने कहा कि मैंने तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर दिया है। इस तरह ठाकुर ब्रह्महत्या के पाप से मुक्त हो गया।

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