विधवा स्त्रियों के लिए लहसुन प्याज खाना वर्जित क्यों?
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शास्त्रों का मत है कि जिस स्त्री के पति की मृत्यु हो जाए उसे अपने खान-पान एवं पहनावे में बदलाव कर लेना चाहिए। शास्त्र कहता है कि ऐसी स्त्रियों को अपने भोजन से मांस-मछली एवं लहसुन प्याज का त्याग कर देना चाहिए। शास्त्रों में विधवाओं के लिए मसूर की दाल, शलजम, मूली एवं गाजर का सेवन भी वर्जित बताया गया है।
इनके लिए रंगीन वस्त्र धारण करना की भी मनाही है। यही कारण है कि कुछ सालों पहले तक विधवा होने के बाद महिलाएं केवल सफेद वस्त्र धारण करती थी।
हालांकि अब सामाजिक मान्यताओं में कुछ बदलाव आ गया है और विधवा स्त्रियां रंगीन वस्त्र भी धारण करने लगी हैं। लेकिन शास्त्रों में विधवाओं के लिए जो नियम बताए गए हैं वह यूं ही नहीं हैं, इनका वैज्ञानिक और अध्यात्मिक आधार है।
विधवाओं के लिए सफेद वस्त्र का नियम क्यों?
धार्मिक विषयों के जानकार पंडित जयगोविंद शास्त्री बताते हैं कि, शास्त्रों में महिलाओं के लिए पति की मृत्यु के नवमें दिन सफेद वस्त्र धारण करने का नियम है। इसका आध्यात्मिक कारण यह है कि सफेद वस्त्र सात्विकता का प्रतीक है।
सफेद वस्त्र के माध्यम से विधवा स्त्री को इस बात का बोध कराया जाता है कि भाग्य ने तुमसे तुम्हारे जीवन के सारे रंग छीन लिए हैं।
जिस तरह सफेद वस्त्र में कोई राग नहीं होता उसी प्रकार तुम्हें भी राग द्वेष से मुक्त होकर ईश्वर का ध्यान करते हुए अपना जीवन बिताना है।
सफेद वस्त्र आध्यात्मिक बल भी प्रदान करता है जो विधवा स्त्री को जीवन में आने वाली चुनौतियों से लड़ने की ताकत देता है। हलांकि अब सामाजिक मान्यताएं बदल गई हैं।
शास्त्र के इस नियम का पालन अब कम होता जा रहा है। इसका कारण भी है कि उन दिनों दूसरी शादी की मान्यता नहीं थी। अब विधवा स्त्री पुनः विवाह करके अपना जीवन सुहागन स्त्री की तरह जी सकती है।
विधवा के लिए लहसुन प्याज खाने की मनाही क्यों?
पति की मृत्यु के बाद काम वासना पर नियंत्रण रखने के लिए विधवाओं को लहसुन प्याज जैसी उष्णता वर्द्घक चीजें खाने की मनाही की गई है।