बेहतर अनुभव के लिए एप चुनें।
INSTALL APP

सीता जनक की नहीं तो किसकी बेटी थी?

Updated Sat, 18 May 2013 05:24 PM IST
विज्ञापन
ramayan sita daughter of king janak

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

ख़बर सुनें
वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि
विज्ञापन
को देवी सीता जनक को प्राप्त हुई थी। इसलिए इस तिथि को जानकी नवमी और सीता नवमी के नाम से जाना जाता है। आज यही शुभ तिथि है।

सीता के विषय में रामायण और अन्य ग्रंथों में जो उल्लेख मिलता है उसके अनुसार मिथिला के राजा जनक के राज में कई वर्षों से वर्षा नहीं हो रही थी। इससे चिंतित होकर जनक ने जब ऋषियों से विचार किया तब ऋषियों ने सलाह दिया कि महाराज स्वयं हल चलाएं तो इन्द्र देव की कृपा हो सकती है।

मान्यता है कि बिहार स्थिति सीममढ़ी का पुनौरा गांव वह स्थान है जहां राजा जनक ने हल चलाया था। हल चलाते समय हल एक धातु से टकराकर अटक गया। राजा जनक ने उस स्थान की खुदाई करने का आदेश दिया। इस स्थान से एक कलश निकला जिसमें एक सुंदर सी कन्या थी। राजा जनक निःसंतान थे। इन्होंने कन्या को ईश्वर की कृपा मानकर पुत्री बना लिया। हल का फल जिसे सीत कहते हैं उससे टकराने के कारण कालश से कन्या बाहर आयी थी इसलिए कन्या का नाम सीता रखा गया।

इस घटना से ज्ञात होता है कि सीता राजा जनक की अपनी पुत्री नहीं थी। धरती के अंदर छुपे कलश से प्राप्त होने के कारण सीता खुद को पृथ्वी की पुत्री मानती थी। लेकिन वास्तव में सीता के पिता कौन थे और कलश में सीता कैसे आयी इसका उल्लेख अलग-अलग भाषाओं में लिखे गये रामायण और कथाओं से प्राप्त होता है। अद्भुत रामायण में उल्लेख है कि 'रावण कहता है कि जब मैं भूलवश अपनी पुत्री से प्रणय की इच्छा करूं तब वही मेरी मृत्यु का कारण बने।'

रावण के इस कथन से ज्ञात होता है कि सीता रावण की पुत्री थी। अद्भुत रामायण में उल्लेख है कि, गृत्स्मद नामक ब्राह्मण ,लक्ष्मी को पुत्री रूप मे पाने की कामना से, प्रतिदिन एक कलश मे कुश के अग्र भाग से मंत्रोच्चारण के साथ दूध की बूंदें डालता था। एक दिन जब ब्राह्मण कहीं बाहर गया था तब रावण इनकी कुटिया में आया और यहां मौजूद ऋषियों को मारकर उनका रक्त कलश में भर लिया। यह कलश लाकर रावण ने मंदोदरी को सौंप दिया।

रावण ने कहा कि यह तेज विष हैं इसे छुपाकर रख दो। मंदोदरी रावण की उपेक्षा से दुःखी थी। एक दिन जब रावण बाहर गया था तब मौका देखकर मंदोदरी ने कलश में रखा रक्त पी लिया। इसके पीने से मंदोदरी गर्भवती हो गयी।

लोक लाज के डर से मंदोदरी अपनी पुत्री को कलश में रखकर उस स्थान पर छुपा गयी जहां से जनक ने उसे प्राप्त किया। सीता के संदर्भ में एक अन्य कथा वेदवती नामकी स्त्री से संबंधित है। वेदवती से जुड़ी कहानी जानने के लिए क्लिक करें

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us