फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Raksha Bandhan 2021 Significance of Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2021: जानिए रक्षा बंधन का सही अर्थ, बहन क्यों बांधती है भाई को राखी

Mon, 02 Aug 2021 10:20 AM IST
रुस्तम राणा आनंद पाराशर, नई दिल्ली
आनंद पाराशर, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Mon, 02 Aug 2021 10:20 AM IST
सार

कृष्ण-द्रोपदी, हुमायुं-कर्णावती ऐसी ना जाने कितनी कथाएं इतिहास में दर्ज है जो इस रक्षा सूत्र और इस दिन के महत्व को दर्शाती है। रक्षाबंधन के त्यौहार को मनाने के पीछे इस देश के मनीषियों की गहरी सोच को समझकर उसे आत्मसात करना ही सही मायनों में रक्षाबंधन को समझना है।

विज्ञापन
Raksha Bandhan 2021 Significance of Raksha Bandhan
रक्षाबंधन 2021 - फोटो : Pixabay

विस्तार

हमारी भारतीय संस्कृति इतनी महान और विशाल है कि लगभग सभी समुदाय के लोग इसमें समाहित हो सकते है। अक्सर यह देखा जाता है की सम्पूर्ण विश्व से लोग ना सिर्फ इस देश में भ्रमण करने आते हैं बल्कि हमारी जीवन शैली और सांस्कृतिक विरासत पर शोध भी करते है। ऐसा कोई महीना नहीं होगा जब इस देश में कोई उत्सव या त्यौहार नहीं हो और यही बात भारत को दूसरे देशों से अलग बनाती है। कश्मीर से कन्याकुमारी तक और सौराष्ट्र से असम तक ये देश सांस्कृतिक विविधता से भरा हुआ देश है। 

विज्ञापन


अगर आप गौर से देखे तो इस देश के उत्सव और त्यौहार के पीछे आपसी रिश्ते के बीच मधुरता और सरसता लाने का प्रयोजन होता है। महीने की 15 तिथि किसी का किसी देवता को समर्पित होती है और अमावस पितरों को एवं पूर्णिमा विष्णु को समर्पित होती है। हर तिथि पर किसी ना किसी तरीके से देव स्थान पर लोग ना सिर्फ मिलते हैं बल्कि उस देव की पूजा के माध्यम से मानसिक और आध्यात्मिक शांति भी प्राप्त होती है। एक ऐसा ही पर्व रक्षा बंधन के नाम से जाना जाता है। 

विज्ञापन

Raksha Bandhan 2021 Significance of Raksha Bandhan
रक्षा बंधन 2021 - फोटो : amar ujala

भाई-बहन के बीच नोकझोंक और हल्की तकरार तो होती है, लेकिन श्रावण माह की पूर्णिमा को आने वाले इस पर्व के दिन भाई-बहन के बीच प्रेम और मधुरता बढ़ती है क्योंकि बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है। अक्सर आपने कई मूर्ख वामपंथी या महिला अधिकारों की बात करने वाली फेंक फेमिनिस्टों को यह कहते हुए सुना होगा कि क्या एक स्त्री कमजोर है जो उसे किसी भाई की कलाई पर राखी बांधकर अपनी रक्षा का वचन लेना पड़े? 

दरअसल ये मुर्ख और दोयम दर्जे के लोग ना इस देश की संस्कृति को समझते हैं और ना ही रक्षा सूत्र की अहमियत को जानते है। ये धूर्त भूल जाते हैं कि देवासुर संग्राम में दशरथ की रक्षा कर उसे पृथ्वी पर लाने वाली केकैयी स्त्री थी। ये लोग भूल जाते है कि वैदिक काल में शस्त्र और शास्त्र शिक्षा हर स्त्री के लिए अनिवार्य थी। 

इतिहास आज भी उन वीरांगनाओं के कथानकों से भरा पड़ा है जिन्होनें स्त्री होने के बाद भी अपने राजा, पति और भाई की रक्षा की। पुराण और इतिहास का सही अध्ययन नहीं करने के कारण कुछ मुर्ख स्त्री अधिकारों का झंडा लेकर उन्हें वैदिक परंपरा से दूर करने की कोशिश करते है। बहन-कमजोर नहीं होती बल्कि इस दिन वो भाई के प्रति अपनी आत्मीयता और प्रेम का प्रदर्शन करती है। अपने भाई की लंबी उम्र की कामना करती है और बदले में भाई उसे जीवन भर के साथ का वचन देता है। 

पुराणों में रक्षा सूत्र का उल्लेख है। दरअसल एक मन्त्र के साथ रक्षा सूत्र को 3 बार लपेटा जाता है। वो मन्त्र इस प्रकार है -
येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबलः। 
तेन त्वां मनुबध्नामि, रक्षं माचल माचल।।

Raksha Bandhan 2021 Significance of Raksha Bandhan
Raksha Bandhan 2021 - फोटो : Needpix.com

इस मन्त्र का भावार्थ यह है कि जिस प्रकार लक्ष्मी ने बलि को रक्षा सूत्र बांधकर वचन से बांधा उसी प्रकार मैं भी आपको अपनी रक्षा के लिए ये बांधता हूँ। अब ये सिर्फ एक बहन अपने भाई को ही नहीं बांधती है बल्कि हर पूजा में, हर अवसर पर इस प्रकार का रक्षा सूत्र बांधना इस संस्कृति का हिस्सा है। यह रक्षा सूत्र दो लोगों के बीच के रिश्ते में डोर की तरह काम करता है। उनके स्नेह को, प्रेम को, आत्मीयता को बनाए रखने का काम करता है।

पुराणों में वर्णन है कि बलि को वचन देकर जब विष्णु पाताल जा पहुंचे तो श्रावण माह की पूर्णिमा को ही लक्ष्मी ने रक्षा सूत्र बांधकर विष्णु को मांगा। इसी दिन भगवान यमराज को उनकी बहन यमुना ने रक्षा सूत्र बांधा और यम ने उसे अमर होने का वरदान दिया। दरअसल कालांतर में संस्कृति का पतन होते 2 वो रक्षा सूत्र राखी हो गया और आत्मीयता की जगह गिफ्ट ने ले ली। आज राखी का मतलब सिर्फ बहन को पैसे देना, उसे गिफ्ट देना और उसे बाहर घुमाना भर रह गया है। स्नेह, सद्भावना और कर्तव्य से बंधा हुआ ये त्यौहार अब बस नाम मात्र का रह गया गया है। 

रक्षा सूत्र के महत्व का अंदाज़ा आप इसी से लगा सकते हैं कि कारगिल युद्ध के समय रक्षा बंधन का त्यौहार नहीं था लेकिन देश के वीर जवानों के लिए लाखों महिलाओं ने रक्षा सूत्र भेजे। ये प्रतीक है इस आत्मा के पावन रिश्ते का जिसे सिर्फ इस देश में महसूस किया जा सकता है। रक्षा बंधन का अर्थ सिर्फ मिठाई खाना और बहन को गिफ्ट देना नहीं है।

यह त्यौहार पूरे विश्व को भारत एक सन्देश देता है कि विपरीत लिंग को भी अपनी बहन और मां की नजर से देखकर उससे रक्षा सूत्र के द्वारा बंध जाना सिर्फ इस देश में संभव है। कृष्ण-द्रोपदी, हुमायुं-कर्णावती ऐसी ना जाने कितनी कथाएं इतिहास में दर्ज है जो इस रक्षा सूत्र और इस दिन के महत्व को दर्शाती है। रक्षाबंधन के त्यौहार को मनाने के पीछे इस देश के मनीषियों की गहरी सोच को समझकर उसे आत्मसात करना ही सही मायनों में रक्षाबंधन को समझना है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed