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Raksha Bandhan 2021: जानिए श्रावण पूर्णिमा पर क्यों किया जाता है श्रावणी उपाकर्म ?
Sun, 22 Aug 2021 01:05 PM IST
विनोद शुक्ला
पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य, नई दिल्ली
पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य, नई दिल्ली
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sun, 22 Aug 2021 01:05 PM IST
सार
श्रावण कृष्णपक्ष की प्रतिपदा से लेकर पूर्णिमा पर्यंत शिव के निवास की ये अंतिम तिथि रहती है। इस दिन तीर्थों के जल अथवा अनेक प्रकार की सामग्रियों से परमेश्वर श्री शिव अभिषेक करना, पंचाक्षर मंत्र का जाप, जप-तप, पूजा-पाठ और दान्पुन्य का विशेष महत्व रहता है।
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Raksha Bandhan 2021
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आध्यात्मिक उन्नति का पर्व श्रावणी उपाकर्म 22 अगस्त रविवार को है। इस दिन को भगवान शिव के पृथ्वी पर भ्रमण का अंतिम दिन के रूप में मनाया जाता है। श्रावणी पूर्णिमा के दिन जब चन्द्र अपनी सम्पूर्ण कलाओं और सहस्रों शीतल रश्मियों से संसार को आच्छादित कर देते हैं और माँ महालक्ष्मी पाताल लोक के राजा बलि के यहां से बलि को रक्षासूत्र बांधकर अपने पति श्रीहरि विष्णु को मुक्त करा लेती हैं तो भगवान शिव मां शक्ति और गणों के साथ कैलाश पर्वत की ओर प्रस्थान करते हैं।
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इस प्रकार उत्तराखंड के मोक्ष दायिक माया क्षेत्र हरिद्वार में श्रावण कृष्णपक्ष की प्रतिपदा से लेकर पूर्णिमा पर्यंत शिव के निवास की ये अंतिम तिथि रहती है। इस दिन तीर्थों के जल अथवा अनेक प्रकार की सामग्रियों से परमेश्वर श्री शिव अभिषेक करना, पंचाक्षर मंत्र का जाप, जप-तप, पूजा-पाठ और दान्पुन्य का विशेष महत्व रहता है। वैदिक ब्राह्मणों द्वारा इसी दिन 'श्रावणी उपाकर्म' किया जाता हैं इसलिए वैदिक ब्राह्मण गण इस दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदी, तालाब तीर्थ या देवालय पहुँच कर हेमाद्रि संकल्प करते हैं। इस आध्यात्मिक विधान में षटकर्म, तीर्थों का आह्वाहन, संकल्प, गायका घी, दूध, दही, गोबर और गोमूत्र (पंचगव्य) से स्नान सहित शिखा सिंचन, नवीन यज्ञोपवीत धारण के बाद श्रीविष्णु का पूजन करना चाहिए।
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पुनः प्रजापिता ब्रह्मा, चारों वेद और ऋषियों का पुरुष सूक्त के मंत्रों द्वारा आवाहन/स्तवन करना चाहिए। विधान पूर्ण होने पर आचार्य के हाथों रक्षाबंधन बंधवाया जाता है। जिस स्थान पर सामूहिक व्यवस्था हो वहां सभी एक दूसरे को रक्षासूत्र बांधने का बिधान है। इस दिन ग्रामीण क्षेत्रों में कुल पुरोहित द्वारा अपने यजमानों के घर जाकर रक्षा सूत्र बांधते हैं। सभी सनातनधर्मी ब्राह्मण अपनी वाणी की पवित्रता, सत्याचरण, मन, वचन और कर्म की पवित्रता का संकल्प लेकर यज्ञोपवीत बदलते हैं। पूजनोपरान्त विष्णु-लक्ष्मी के दर्शन से सुख और समृद्धि की प्राप्ति तो होतीही है साथ ही इस पूर्णिमा के दिन पर शिवलिंग पर शहद, और पंचामृत का लेप करने से प्राणी कर्ज से मुक्ति पा लेता है। विद्यार्थियों को इस दिन शिवालिंग पर मिश्री और दूध के अमृततुल्य मिश्रण का लेप करते हुए उत्तम विद्या की प्राप्ति हेतु प्रार्थना करना चाहिए। अविवाहित अथवा विवाह में विलंब हो रही महिलाओं को गन्ने के रस से अभिषेक करने चाहिए, जिससे शिव-शक्ति की कृपा से उनके जीवन में उत्तम दाम्पत्य सुख की प्राप्ति होगी।
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