{"_id":"d2432852-7110-11e2-9304-d4ae52bc57c2","slug":"poverty-not-comes-from-shiva-prasad","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"शिव का प्रसाद खाने को लेकर हिचक है तो जरूर पढ़ें ये खबर","category":{"title":"Religion","title_hn":"धर्म","slug":"religion"}}
शिव का प्रसाद खाने को लेकर हिचक है तो जरूर पढ़ें ये खबर
राकेश झा/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 06 Mar 2016 06:22 PM IST
सार
- अन्य देवी-देवताओं का प्रसाद लोग ग्रहण करते हैं और महादेव का प्रसाद ग्रहण करने से लोग हिचकते
- धातु से बने शिवलिंग एवं परद के शिवलिंग पर चढ़ा हुआ प्रसाद खा सकते हैं।
विज्ञापन
- फोटो : getty images
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
महादेव देवों के देव कहलाते हैं। लेकिन अन्य देवी-देवताओं का प्रसाद लोग ग्रहण करते हैं और महादेव का प्रसाद ग्रहण करने से लोग हिचकते हैं। शिव जी के प्रसाद को लेकर लोगों के मन में यह भय रहता है कि प्रसाद ग्रहण करने से गरीब हो जाएंगे।
विज्ञापन
इसका कारण यह है कि शिव जी के मुख से चण्डेश्वर नाम के शिव के गण प्रकट हुए हैं। चण्डेश्वर को भूत-प्रेतों का प्रधान माना जाता है। शिवलिंग पर चढ़ा हुआ प्रसाद चण्डेश्वर का भाग होता है।
विज्ञापन
चण्डेश्वर का अंश यानी प्रसाद ग्रहण करना भूत-प्रतों का अंश खाना माना जाता है। इसलिए कहा जाता है कि शिवलिंग पर चढ़ा प्रसाद नहीं खाना चाहिए। 'पण्डित मुरली झा' कहते हैं कि सभी शिवलिंग पर चढ़ा हुआ प्रसाद चण्डेश्वर का भाग नहीं होता है।
विज्ञापन
जानिए, किस तरह के शिवलिंग पर चढ़ा प्रसाद नहीं खाना चाहिए
जिस शिवलिंग का निर्माण साधारण पत्थर, मिट्टी एवं चीनी मिट्टी से होता उन शिवलिंग पर चढ़ा प्रसाद नहीं खाना चाहिए। इन शिवलिंगों पर चढ़ा प्रसाद किसी नदी अथवा जलाशय में प्रवाहित कर देना चाहिए।
धातु से बने शिवलिंग एवं परद के शिवलिंग पर चढ़ा हुआ प्रसाद चण्डेश्वर का अंश नहीं होता है। यह महादेव का भाग होता है। इसलिए इन्हें ग्रहण करने से दोष नहीं लगता है। शिवलिंग के साथ शालग्रम होने पर भी दोष समाप्त हो जाता है। इसलिए शालग्राम के साथ शिवलिंग की पूजा करके शिवलिंग पर चढ़ा हुआ प्रसाद खाने से किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होता है और न गरीबी आती है।
जो प्रसाद शिवलिंग के ऊपर चढ़ाया नहीं गया हो और शिव की साकार मूर्ति को अर्पित किया गया हो वह प्रसाद ग्रहण करने से भी किसी तरह की हानि नहीं होती है बल्कि शिव की कृपा प्राप्त होती है।
धातु से बने शिवलिंग एवं परद के शिवलिंग पर चढ़ा हुआ प्रसाद चण्डेश्वर का अंश नहीं होता है। यह महादेव का भाग होता है। इसलिए इन्हें ग्रहण करने से दोष नहीं लगता है। शिवलिंग के साथ शालग्रम होने पर भी दोष समाप्त हो जाता है। इसलिए शालग्राम के साथ शिवलिंग की पूजा करके शिवलिंग पर चढ़ा हुआ प्रसाद खाने से किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होता है और न गरीबी आती है।
जो प्रसाद शिवलिंग के ऊपर चढ़ाया नहीं गया हो और शिव की साकार मूर्ति को अर्पित किया गया हो वह प्रसाद ग्रहण करने से भी किसी तरह की हानि नहीं होती है बल्कि शिव की कृपा प्राप्त होती है।