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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Pitru Paksha 2024 Know Types Of Shraddh In Hindu Know Rules to Follow

Pitru Paksha 2024: कितने प्रकार के होते हैं श्राद्ध ? जानिए महत्व, लाभ और विधि

Tue, 17 Sep 2024 03:28 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 17 Sep 2024 03:28 PM IST
सार

भविष्य पुराण में 12 प्रकार के शास्त्रों का उल्लेख मिलता है, जिन्हें पितरों की तृप्ति और उनकी कृपा प्राप्त करने के उद्देश्य से किया जाता है।

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Pitru Paksha 2024 Know Types Of Shraddh In Hindu Know Rules to Follow
Pitru Paksha 2024 Date - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Pitru Paksha 2024: प्रत्येक वर्ष भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से पितृ पक्ष की शुरुआत होती है जिसका समापन आश्विन माह की अमावस्या को होता है। यह अवधि पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए श्रेष्ठ मानी गई है। पितृजन्य समस्त दोषों की शांति के लिए पूर्वजों की मृत्यु तिथि के दिन श्राद्ध कर्म किया जाता है। इसमें ब्राह्मणों को भोजन कराने का विधान है। भविष्य पुराण में 12 प्रकार के शास्त्रों का उल्लेख मिलता है, जिन्हें पितरों की तृप्ति और उनकी कृपा प्राप्त करने के उद्देश्य से किया जाता है। ये 12 प्रकार इस प्रकार हैं।
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नित्य श्राद्ध
यह श्राद्ध नियमित रूप से प्रतिदिन किया जाता है। भोजन के पहले गौ ग्रास निकलना नित्य श्राद्ध माना गया है। इससे पितरों की तृप्ति होती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
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काम्य श्राद्ध
काम्य श्राद्ध किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए, किसी की लंबी उम्र, पुत्र प्राप्ति या जीवन में सुख-संपत्ति की प्राप्ति के लिए। इसे विशेष मनोकामना की पूर्ति के लिए किया जाता है।
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नैमित्तिक श्राद्ध
पितृ पक्ष में किया जाने वाला श्राद्ध  'नैमित्तिक श्राद्ध' कहलाता है।

वृद्धि श्राद्ध
मुंडन,विवाह,उपनयन आदि के अवसर पर किया जाने वाला श्राद्ध 'वृद्धि श्राद्ध' कहलाता है इसे नान्दीमुख भी कहते हैं।  

सपिंडीकरण श्राद्ध
यह श्राद्ध मृत्यु के 12वें दिन या कुछ स्थानों पर 13वें दिन किया जाता है। इस श्राद्ध से पितरों का सम्मिलन पूर्वजों की पिंडियों में होता है। इसे करने से पितरों को मोक्ष प्राप्ति में सहायता मिलती है।

पार्वण श्राद्ध
पार्वण श्राद्ध अमावस्या, पूर्णिमा या संक्रांति जैसे विशेष दिनों में किया जाता है। इसे पारिवारिक श्राद्ध भी कहा जाता है, जिसमें सभी पितरों के लिए तर्पण और पूजा की जाती है।


गोष्ठी श्राद्ध
गौशाला में वंशवृद्धि के लिए किया जाने वाला श्राद्ध 'गोष्ठी श्राद्ध' कहलाता है।

शुद्धि श्राद्ध
यह श्राद्ध पवित्रता और शुद्धि के लिए किया जाता है। इसे तब किया जाता है जब किसी अशुद्ध या अपवित्र स्थिति के बाद शुद्धिकरण की आवश्यकता होती है। यह घर या परिवार के शुद्धिकरण के लिए महत्वपूर्ण होता है।

कर्मांग श्राद्ध
गर्भाधान,सीमंत,पुंसवन संस्कार के समय किया जाने वाला श्राद्ध कर्म 'कर्मांग श्राद्ध' कहलाता है।

दैविक श्राद्ध
सप्तमी तिथियों में हविष्यान्न से देवताओं के लिए किया जाने वाला श्राद्ध 'दैविक श्राद्ध' माना गया है।

यात्रार्थ श्राद्ध
तीर्थ यात्रा पर जाने से पहले और वहां पर किए जाने वाले श्राद्ध को 'यात्रार्थ श्राद्ध' कहा जाता है।

पुष्टयर्थ श्राद्ध
अपने वंश और व्यापार आदि की वृद्धि के लिए किया जाने वाला श्राद्ध 'पुष्टयर्थ श्राद्ध' की श्रेणी में आता है।    


 
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