फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   parivartani padma ekadashi vrat katha

शुभ संयोग के साथ आयी है भगवान विष्णु और लक्ष्मी की कृपा दिलाने वाली एकादशी

Thu, 24 Sep 2015 08:47 AM IST
Updated Thu, 24 Sep 2015 08:47 AM IST
विज्ञापन
parivartani padma ekadashi vrat katha

इस वर्ष पद्मा एकादशी जिसे परिवर्तनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है वह 24 सितंबर गुरुवार के दिन है। गुरुवार भगवान विष्णु का दिन माना जाता है ऐसे में इस एकादशी का महत्व बढ़ गया है।

विज्ञापन


शास्त्रों में बताया गया है कि यह ऐसी एकादशी है जिसे देवी-देवता भी रखते हैं। इसका कारण यह  है कि इस दिन चतुर्मास में शयन के दौरान भगवान विष्णु करवट बदलते हैं। इसलिए चतुर्मास की यह बड़ी ही खास एकादशी मानी जाती है।
विज्ञापन


यह एकादशी हर साल भाद्र मास में शुक्ल पक्ष को आती है। इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु सहित देवी लक्ष्मी की पूजा करने से इस जीवन में धन और सुख की प्राप्ति तो होती ही है। परलोक में भी इस एकादशी के पुण्य से उत्तम स्थान मिलता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

पद्म पुराण में है बताया गया है महत्‍व

parivartani padma ekadashi vrat katha

इस एकादशी के महत्व के बारे मे पुराणों में उल्लेख मिलता है कि भगवान विष्णु की प्रसन्नता के लिए इस दिन स्वर्ग के देवी-देवता भी व्रत रखते हैं। पद्म पुराण में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि इस एकादशी के दिन विष्णु के वामन रूप की पूजा करनी चाहिए। क्योंकि भगवान इन चार महीनों में वामन रूप में पाताल में निवास करते हैं। इसलिए विष्णु, लक्ष्मी सहित इसदिन वामन भगवान की भी पूजा करनी चाहिए।


पुरणों में बताया गया है कि राजा बलि से जब भगवान विष्णु ने तीन पग में उनका सबकुछ ले लिया तब राजा बलि ने वामन रुप में भगवान विष्णु को पहचान लिया और उनसे वरदान मांगा कि आप भले ही मुझ से मेरा सब कुछ लीजिए लेकिन मेरे साथ पातल में चलकर निवास कीजिए।

इसके बाद भगवपन विष्णु बलि के साथ पाताल में रहने चले गए। इसके बाद देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को पाताल से मुक्त करवाया। इसके बाद से भगवान विष्णु अपने वचन के अनुसार हर वर्ष चतुर्मास में पाताल में वामन रुप में निवास करते हैं

मृत्‍यु के बाद भी काम आता है इस एकादशी का पुण्‍य

parivartani padma ekadashi vrat katha

पुराणों में उल्लेख किया गया है कि जो भी व्यक्ति परिवर्तनी एकादशी के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु सहित लक्ष्मी और वामन भगवान की पूजा करते हैं उन्हें वाजपेय यज्ञ का फल प्राप्त होता है। इस पुण्य के फल से व्यक्ति को मृत्यु के बाद प्राप्त होने वाले कष्ट को नहीं भोगना पड़ता है।


भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि जो व्यक्ति पद्मा एकादशी के दिन उनके वामन अवतार की पूजा करता है वह एक साथ ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव की पूजा का फल प्राप्त कर लेते हैं।

ऐसा व्यक्ति पृथ्वी लोक में यश और सम्मान प्राप्त करता है तथा मृत्यु के बाद स्वर्ग लोक में स्थान प्राप्त करके चन्द्रमा के समान चमकता है। पद्मा एकादशी के दिन जो भक्त कमल से वामन भगवान की पूजा करता है उसकी सभी मनोकामना पूरी होती है।

पद्मा एकादशी के विषय में शास्त्र कहता है कि इस दिन चावल, दही एवं चांदी का दान करना उत्तम फलदायी होता है। जो लोग किसी कारणवश पद्मा एकादशी का व्रत नहीं कर पाते हैं उन्हें पद्मा एकादशी के दिन भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों की कथा का पाठ करना चाहिए। विष्णु सहस्रनाम एवं रामायण का पाठ करना भी इस दिन उत्तम फलदायी होता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed