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इस एकादशी के व्रत से हजार गाय दान करने का पुण्य मिलता है
राकेश/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 27 Mar 2014 09:19 AM IST
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इस वर्ष 27 मार्च को सभी प्रकार के पापों का नाश करने वाली पुण्दायी पापमोचनी एकादशी है। पुराणों में बताया गया है इस एकादशी के व्रत से जाने-अनजाने किए हुए सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।
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पापमोचिनी एकादशी व्रत कथा
मेधावी ऋषि कठोर तप में लीन थे, उनके तप व पुण्यों के प्रभाव से देवराज इन्द्र घबरा गए। ऋषि की तपस्या भंग करने के लिए इन्द्र ने मंजुघोषा नामक अप्सरा को भेजा। मेधावी ऋषि अप्सरा के हाव-भाव को देखकर उस पर मुग्ध हो गए।
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मेधावी ऋषि शिव भक्ति छोड़कर मंजुघोषा के साथ रहने लगे। कई साल गुजर जाने पर मंजुघोषा ने ऋषि से स्वर्ग वापस जाने की आज्ञा मांगी। ऋषि को तब भक्ति मार्ग से हटने का बोध हुआ और अपने आप पर ग्लानि होने लगी।
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धर्म भ्रष्ट होने का कारण अप्सरा को मानकर ऋषि ने अप्सरा को पिशाचिनी हो जाने का शाप दिया। अप्सरा इससे दुःखी हो गई और शाप से मुक्ति के लिए प्रार्थना करने लगी। इसी समय देवर्षि नारद वहां आये और अप्सरा एवं ऋषि दोनों को पाप से मुक्ति के लिए पापमोचिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी।
नारद द्वारा बताये गये विधि-विधान से दोनों ने पाप मोचिनी एकादशी का व्रत किया जिससे वह पाप मुक्त हो गये। शास्त्रों में बताया गया है कि एकादशी की इस कथा को पढ़ने और सुनने से सहस्र गौदान का फल मिलता है।
ब्रह्महत्या, सोने की चोरी और सुरापान करनेवाले महापापी भी इस व्रत से पापमुक्त हो जाते हैं। यह व्रत बहुत पुण्यदायी है।
व्रत के नियम
एकादशी के दिन प्रातः स्नानादि से निवृत होकर भगवान विष्णु की पूजा करें। घी का दीपक जलाकर भगवान से जाने-अनजाने जो भी पाप हुए हैं उससे मुक्ति पाने के लिए प्रार्थना करें। जितना अधिक संभव हो 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करें।
रात्रि जागरण करते हुए भजन करें तथा विष्णु भगवान के अवतारों की कथाओं और लीलाओं का पाठ करें। झूठ, लोभ, छल, कपट एवं काम भावना पर अंकुश रखें। व्रत करते हुए इस प्रकार की भावना मन में आने पर व्रत का लाभ नहीं मिल पता है।