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नवरात्रि तीसरा दिन: संपूर्ण कल्याण के लिए मां चन्द्रघंटा की पूजा

Tue, 01 Oct 2019 01:01 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन
अनीता जैन Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 01 Oct 2019 01:01 AM IST
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navratri 2019 story of chandraghanta mata
festival

नवरात्रि में दुर्गा-उपासना के तीसरे दिन की पूजा का अत्याधिक महत्व है। मां दुर्गाजी की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है। नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन इन्हीं के विग्रह का पूजन-अर्चन किया जाता है। इनका यह स्वरुप परम शान्तिदायक और कल्याणकारी है। बाघ पर सवार मां चंद्रघंटा के शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है। इनके मस्तक में घंटे के आकार का अर्धचंद्र विराजमान है, इसलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। दस भुजाओं वाली देवी के हर हाथ में अलग-अलग शस्त्र विभूषित है।

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इनके गले में सफेद फूलों की माला सुशोभित रहती हैं। इनकी मुद्रा युद्ध के लिए उद्धत रहने वाली होती है। इनके घंटे की तरह भयानक ध्वनि से अत्याचारी दानव, दैत्य और राक्षस सदैव प्रकम्पित रहते है। दुष्टों का दमन और विनाश करने में सदैव तत्पर रहने के बाद भी इनका स्वरुप दर्शक और आराधक के लिए अत्यंत सौम्यता और शांति से परिपूर्ण रहता है।अतः भक्तों के कष्टों का निवारण ये शीघ्र ही कर देती हैं। इनका वाहन सिंह है अतः इनका उपासक सिंह की तरह पराक्रमी और निर्भय हो जाता है।
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इनके घंटे की ध्वनि सदा अपने भक्तों की प्रेत-बाधादि से रक्षा करती है। इनका ध्यान करते ही शरणागत की रक्षा के लिए इस घंटे की ध्वनि निनादित हो उठती है। इस दिन साधक का मन 'मणिपुर चक्र' में प्रविष्ट होता है और मां चंद्रघंटा की कृपा से उसे आलोकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं। मां चंद्रघंटा के भक्त और उपासक जहां भी जाते है लोग उन्हें देखकर शांति का अनुभव करते है। इनके साधक के शरीर से दिव्य प्रकाश युक्त परमाणुओं का अदृश्य विकिरण होता है। यह दिव्य क्रिया साधारण चक्षुओं से दिखाई नहीं देती, किंतु साधक व उसके संपर्क में आने वाले लोग इस बात का अनुभव करते हैं।        
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पूजा फल
इनकी आराधना से साधकों को चिरायु, आरोग्य, सुखी और संपन्न होने का वरदान प्राप्त होता है। मां चंद्रघंटा की कृपा से साधक के समस्त पाप और बाधाएं नष्ट हो जाती है। इनकी आराधना से प्राप्त होने वाला एक बहुत बड़ा सद्गुण यह भी है कि साधक में वीरता और निर्भयता के साथ ही सौम्यता एवं विनम्रता का भी विकास होता है। उसके मुख, नेत्र तथा सम्पूर्ण काया में कांति वृद्धि होती है एवं स्वर में दिव्य-अलौकिक माधुर्य का समावेश हो जाता है। 


क्रोधी, छोटी-छोटी बातों से विचलित हो जाने और तनाव लेने वाले तथा पित्त प्रकृति के लोग मां चंद्रघंटा की भक्ति करें।

ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा विधि एवं आराधना मंत्र 
मां को शुद्ध जल और पंचामृत से स्नान कराएं। अलग-अलग तरह के फूल,अक्षत, कुमकुम, सिन्दूर,अर्पित करें। केसर-दूध से बनी मिठाइयों या खीर का भोग लगाएं। मां को सफेद कमल,लाल गुडहल और गुलाब की माला अर्पण करें और प्रार्थना करते हुए मंत्र जप करें। 

"या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नमः।"

पिंडजप्रवरारूढा, चंडकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं, चंद्रघंटेति विश्रुता।।

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