समय कम हो तब दुर्गा सप्तशती का पाठ कैसे करें?
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दुर्गा सप्तशती का विधिपूर्वक किया गया पाठ जीवन में अन्न, धन, वस्त्र, यश, शौर्य, शांति और मनवांछित फल प्रदान करता है। विशेषकर, नवरात्र में पहले दिन कलश स्थापना के बाद दुर्गा सप्तशती के तेरह अध्यायों का पाठ करने का विधान है। रहस्याध्याय के अनुसार, जिस मनुष्य को एक दिन में पूरे पाठ करने का अवसर न मिले, तो वह एक दिन केवल मध्यम चरित्र का तथा दूसरे दिन शेष दो चरित्रों का पाठ कर सकता है।
प्रतिदिन पाठ करने वाले मनुष्य एक दिन में पूरा पाठ न कर पाएं, तो वे एक, दो, एक, चार, दो, एक और दो अध्यायों के क्रम से सात दिनों में पाठ पूरा कर सकते हैं। संपूर्ण दुर्गासप्तशती का पाठ न करने वाले मनुष्य देवी कवच, अर्गलास्तोत्र, कीलकम का पाठ करके देवी सूक्तम पढ़ सकते हैं।
लेकिन नवरात्र में दुर्गा कवच प्रत्येक देवी भक्त को पढ़ना चाहिए। समय का अभाव हो, तो केवल सूक्तम से भी भगवती की आराधना करके उन्हें प्रसन्न किया जा सकता है। देवी सूक्तम से पहले अगर सातवां अध्याय पढ़ लिया जाए, तो अधिक लाभकारी रहता है।
नवरात्र में रामचरित मानस पाठ का क्या महत्व है?
नवरात्र आदिशक्ति को जागृत करने का प्रमुख पर्व है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने लंका पर विजय प्राप्त करने से पूर्व माता भगवती और भगवान शिव की आराधना की थी। इसलिए इन दिनों तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस का पाठ किया जाता है।
कहते हैं जिस घर में पूर्ण श्रद्धा भाव से रामचरितमानस का अखंड पाठ होता है, वहां श्री राम के अनन्य भक्त पवनपुत्र हनुमानजी स्वयं मौजूद रहते हैं और प्रभु श्रीराम तथा माता भगवती का आशीर्वाद अपने माध्यम से समस्त भक्तों तक पहुंचाते हैं।
रामचरितमानस का पाठ पूर्ण होने पर पारायण किया जाता है। इसके लिए विधि-विधान से रामायण की आरती, श्रीरामजी की वंदना, हनुमानजी की आरती के बाद गरीबों को श्रद्धानुसार भोजन कराकर दान देने का विधान है।
रामचरितमानस का पाठ करने वाले विद्वान मनीषी को भोजन कराकर नए वस्त्र, धन, अन्न, फल आदि का दान दें। पाठ का श्रवण करने वाले श्रद्धालुओं को बूंदी का प्रसाद वितरित किया जाता है।
नवरात्र में कौन सी सब्जियां खा सकते हैं
नवरात्र में फलाहार या सात्विक आहार लिए जाने का विधान है। इन दिनों प्याज, लहसुन, टमाटर, हरी मटर, मांसाहार जैसे तामसिक आहार के सेवन से बचना चाहिए।
आहार में कुट्टू, सिंघाड़े का आटा, समा के चावल, फल, गौ दुग्ध, दही, घी, आम, अनार, नारंगी, कदली फल, शाक, सूखे मेवे के व्यंजन आदि लिए जा सकते हैं।
उद्यापन के समय सूजी का हलवा और काले चने के साथ-साथ पूरी, सब्जी, खीर आदि का प्रसाद लगाया जा सकता है।
नवरात्र में कितनी कन्याओं को भोजन करना चाहिए
नवरात्र में कुमारी कन्याओं के पूजन को सर्वोत्तम माना गया है। देवी पुराण के अनुसार होम, दान व जप के साथ कुमारी पूजन से देवी शीघ्र प्रसन्न होती हैं। स्कन्द पुराण में कहा गया है, नवरात्र में या तो प्रतिदिन एक-एक कन्या का पूजन करें या फिर दो-तीन गुनी कन्याओं को भोजन कराएं।
उनके पांव धोकर स्वच्छ भूमि पर आसन बिछाकर गंध, पुष्पमाला से पूजन करके कन्याओं को भोजन कराने से देवी की कृपा होती है। देवी के उद्यापन के लिए अपनी श्रद्धा और आर्थिक स्थिति के अनुसार ही कन्याओं को बुलाना चाहिए।
यह संख्या एक, दो, पांच, सात, नौ, ग्यारह या इससे अधिक हो सकती है। कन्याएं कितनी भी हों, उनको पूर्ण सम्मान और श्रद्धा भाव से भोजन कराना चहिए।