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श्राद्घपक्ष का यह दिन महिलाओं के लिए है खास

Tue, 16 Sep 2014 03:06 PM IST
Updated Tue, 16 Sep 2014 03:06 PM IST
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matri navmi importance in shradh paksha

श्राद्घपक्ष का एक दिन महिलाओं को समर्पित होता है। इस दिन को मातृनवमी के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों में बताया गया है कि परिवार में जिन महिलाओं की मृत्यु हुई है उनकी आत्मा की संतुष्टि के लिए यह तिथि उत्तम है। यह तिथि इस वर्ष 17 सितंबर को है।

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इस दिन सुहागन स्त्रियों को भोजन करवाने से परिवार में मृत स्त्रियों की आत्मा तृप्त हो जाती है। पुराणों में एक रोचक विषय का उल्लेख किया गया है कि प्राण त्याग करने के बाद महिलाएं भी पुरूष रूप को धारण कर लेती हैं और पितरों में शामिल हो जाती हैं।
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पितर देवताओं के समान प्रभावशाली होते हैं। कुण्डली में ग्रह नक्षत्र अनुकूल भी बैठे हों तब भी पितृगणों के नाराज होने पर ग्रह शुभ फल नहीं दे पाते हैं। जो महिलाएं मृत्यु के बाद पितर बन जाती हैं वह मातृनवमी के दिन अपने परिवार के सदस्यों के बीच आती हैं।

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सुहागन स्त्रियों के भोजन और दान देने के फायदे

matri navmi importance in shradh paksha

माता एवं पितरों के नाम से जो व्यक्ति इस दिन ब्राह्मणों एवं सुहागन स्त्रियों को भोजन करवाते हैं उन पर पितर प्रसन्न होते हैं। यह अपने संतान और परिजनों पर प्रसन्न होकर इन्हें समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

इससे देवताओं की भी कृपा भी प्राप्त होती और ग्रह नक्षत्र भी अनुकूल फल प्रदान करते हैं। विशेष तौर पर पितरों की पूजा से राहु केतु से संबंधित ग्रहों का अशुभ प्रभाव दूर होता है।

इसके विपरीत जिनके घर में मातृनवमी के दिन सुहागन स्त्रियों एवं ब्राह्मणों को भोजन नहीं करवाया जाता है। उनके पितर नाराज और दु:खी होकर कष्ट एवं रोग का शाप देते हैं जिससे सुख समृद्धि में बाधा आती है।

शास्त्रों में कहा गया है कि मातृनवमी के दिन सुहागन स्त्रियों को सुहाग सामग्री भी दान करना चाहिए।

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