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14 जनवरी को मकर संक्रांति, जानिए सभी 12 संक्रांतियों का ज्योतिष शास्त्र में क्या है महत्व?
Wed, 13 Jan 2021 11:12 AM IST
विनोद शुक्ला
पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य
पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Wed, 13 Jan 2021 11:12 AM IST
सार
- मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी, बृहस्पतिवार को प्रतिपदा तिथि, श्रवण नक्षत्र, वज्र योग और बव करण में मनाया जाएगा।
- संक्रांति का पुण्यकाल दोपहर के 2 बजकर 19 मिनट तक मान्य रहेगा।
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Makar Sankranti 2021: 14 जनवरी को सूर्य मकर राशि में जाकर कई अन्य ग्रहों के साथ योग बना रहे हैं
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मकर संक्रांति का महापुण्यफलदायक पर्व 14 जनवरी, बृहस्पतिवार को प्रतिपदा तिथि, श्रवण नक्षत्र, वज्र योग और बव करण में मनाया जाएगा। इस संक्रांति का पुण्यकाल दोपहर के 2 बजकर 19 मिनट तक मान्य रहेगा। बृहस्पतिवार को पड़ने वाली मकर संक्रांति के फलस्वरूप ये संक्रांति 'मन्दा' नाम से जानी जाएगी। इस संक्रांति के दिन श्रवण नक्षत्र विद्यमान रहने के फलस्वरूप महोदरी नाम से भी जाना जाएगा जो चोरों तरफ से ठगों और भ्रष्टाचारियों को बढ़ावा देगी। मुहूर्त ग्रंथों के अनुसार मन्दा नामक संक्रांति लेखकों, शिक्षाविदों, प्रकाशकों, स्कूल कॉलेज खोलने वालों, शिक्षण संस्थाओं, प्रवचन, सत्संग, ब्राह्मणों-पुरोहितों के लिए श्रेष्ठ मानी गई है। विद्यार्थियों तथा प्रतियोगिता में सम्मिलित होने वाले छात्रों को भी इस
संक्रांति के पुण्य प्रभाव से अच्छी सफलता के संयोग हैं।
ये संक्रांतियां अपने नाम और स्वभाव के अनुसार ही फल देती हैं। 12 संक्रांतियों में प्रत्येक संक्रांति जिन-जिन अभीष्ट समय में होती है उन अभीष्ट समयों में उक्त चर, स्थिर करणों में से जो भी करण हो उसी के अनुसार संक्रांति का शुभ-अशुभ वाहन वस्त्र आदि का भी विचार किया जाता है। उसके अनुसार इस वर्ष संक्रांति के समय बव करण विद्यमान होगा जिसके फलस्वरूप संक्रांति का वाहन सिंह होगा। बृहस्पतिवार को पड़ने वाली इस संक्रांति के शुभ प्रभाव स्वरूप जनता निरोगी रहेगी।
शीर्ष नेतृत्व में सद्भाव और फसलों की अच्छी उपज होगी। अपराधियों और पाखंडियों के लिए यह संक्रांति विनाशक भी सिद्ध होगी। श्रवण नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातकों के लिए संक्रांति के कुछ अशुभ फल भी प्राप्त हो सकते हैं इसलिए उन्हें भगवान सूर्य की आराधना करनी चाहिए।
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वार के अनुसार संक्रांतियों के नाम
घोरा संक्रांति- रविवार को पड़ने वाली संक्रांति का नाम घोरा है शूद्रों के सुख को बढ़ाने वाली होती है।
ध्वांक्षी संक्रांति- सोमवार को ध्वांक्षी नाम की संक्रांति व्यापारियों को हर प्रकार से लाभ देने वाली कही गयी है।
महोदरी संक्रांति- मंगलवार को महोदरी नामक संक्रांति चोरों, ठगों और भ्रष्टाचारियों के लिए अनुकूल रहती है।
मंदाकिनी संक्रांति- बुधवार को मंदाकिनी नाम की संक्रांति राजाओं, शीर्ष अधिकारियों के प्रभाव को बढ़ाने वाली मानी गयी है।
मन्दा संक्रांति- गुरुवार को मन्दा नाम धारण करने वाली संक्रांति ब्राह्मणों शिक्षाविदों और संतों के लिए अति शुभ मानी गयी है।
मिश्रा संक्रांति- शुक्रवार को मिश्रा नामधारी संक्रांति पशु-पक्षियों के लिए शुभ कही गयी है।
राक्षसी संक्रांति- शनिवार को पड़ने वाली राक्षसी नाम की संक्रांति चांडालों के लिए हितकर रहती है।
राक्षसी है। सूर्य, शनि और मंगलवार की सूर्य संक्रांतियां जनता के लिए वात, पित्त और कफ जैसे रोगों को बढ़ाती हैं। ये शासन सत्ता के लिए भी कलह का कारण बनती है। सोम, बुध, गुरु और शुक्र के वार में पड़ने वाली संक्रांति जनता तथा किसानों के लिए अतिशुभ फल दायक रहती है। राष्ट्राध्यक्षों में सद्भाव और पड़ोसियों संबंधों की कड़वाहट में कमी आएगी। धर्मभ्रष्ट विधर्मियों-नास्तिकों के लिए भी ये नाशक रहेगी।
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संक्रांति के पुण्य प्रभाव से अच्छी सफलता के संयोग हैं।
ये संक्रांतियां अपने नाम और स्वभाव के अनुसार ही फल देती हैं। 12 संक्रांतियों में प्रत्येक संक्रांति जिन-जिन अभीष्ट समय में होती है उन अभीष्ट समयों में उक्त चर, स्थिर करणों में से जो भी करण हो उसी के अनुसार संक्रांति का शुभ-अशुभ वाहन वस्त्र आदि का भी विचार किया जाता है। उसके अनुसार इस वर्ष संक्रांति के समय बव करण विद्यमान होगा जिसके फलस्वरूप संक्रांति का वाहन सिंह होगा। बृहस्पतिवार को पड़ने वाली इस संक्रांति के शुभ प्रभाव स्वरूप जनता निरोगी रहेगी।
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शीर्ष नेतृत्व में सद्भाव और फसलों की अच्छी उपज होगी। अपराधियों और पाखंडियों के लिए यह संक्रांति विनाशक भी सिद्ध होगी। श्रवण नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातकों के लिए संक्रांति के कुछ अशुभ फल भी प्राप्त हो सकते हैं इसलिए उन्हें भगवान सूर्य की आराधना करनी चाहिए।
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वार के अनुसार संक्रांतियों के नाम
घोरा संक्रांति- रविवार को पड़ने वाली संक्रांति का नाम घोरा है शूद्रों के सुख को बढ़ाने वाली होती है।
ध्वांक्षी संक्रांति- सोमवार को ध्वांक्षी नाम की संक्रांति व्यापारियों को हर प्रकार से लाभ देने वाली कही गयी है।
महोदरी संक्रांति- मंगलवार को महोदरी नामक संक्रांति चोरों, ठगों और भ्रष्टाचारियों के लिए अनुकूल रहती है।
मंदाकिनी संक्रांति- बुधवार को मंदाकिनी नाम की संक्रांति राजाओं, शीर्ष अधिकारियों के प्रभाव को बढ़ाने वाली मानी गयी है।
मन्दा संक्रांति- गुरुवार को मन्दा नाम धारण करने वाली संक्रांति ब्राह्मणों शिक्षाविदों और संतों के लिए अति शुभ मानी गयी है।
मिश्रा संक्रांति- शुक्रवार को मिश्रा नामधारी संक्रांति पशु-पक्षियों के लिए शुभ कही गयी है।
राक्षसी संक्रांति- शनिवार को पड़ने वाली राक्षसी नाम की संक्रांति चांडालों के लिए हितकर रहती है।
राक्षसी है। सूर्य, शनि और मंगलवार की सूर्य संक्रांतियां जनता के लिए वात, पित्त और कफ जैसे रोगों को बढ़ाती हैं। ये शासन सत्ता के लिए भी कलह का कारण बनती है। सोम, बुध, गुरु और शुक्र के वार में पड़ने वाली संक्रांति जनता तथा किसानों के लिए अतिशुभ फल दायक रहती है। राष्ट्राध्यक्षों में सद्भाव और पड़ोसियों संबंधों की कड़वाहट में कमी आएगी। धर्मभ्रष्ट विधर्मियों-नास्तिकों के लिए भी ये नाशक रहेगी।