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महाशिवरात्रि व्रत के नियम और गृहस्थों के लिए सरल पूजा विधि

Tue, 17 Feb 2015 08:48 AM IST
Updated Tue, 17 Feb 2015 08:48 AM IST
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mahashivratri vrat puja vidihi

शास्त्रों में बताया गया है कि संसार में अनेकों प्रकार के व्रत लेकिन कोई भी व्रत महाशिवरात्रि व्रत की समानता नहीं कर सकता। महाशिवरात्रि व्रत परम मंगलमय है। इससे भोग और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए शिव रात्रि व्रत को व्रतराज भी कहा गया है।

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शास्त्रों के अनुसार इस व्रत को जीवनभर करना चाहिए जो व्यक्ति जीवन भर नहीं कर सकते उन्हें कम से कम चौदह वर्ष तक इस व्रत को करना चाहिए इसके बाद विधि विधान के साथ व्रत का उद्यापन करें।
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व्रतराज के सिद्धांत और पौराणिक शास्त्रों के अनुसार शिवरात्रि के व्रत के बारे में भिन्न प्रकार के मत हैं, लेकिन जो सबसे मान्य नियम है उसके अनुसार जब प्रदोष काल रात्रि का आरंभ एवं निशीथ काल (अर्द्धरात्रि) के समय चतुर्दशी तिथि रहे उसी दिन शिवरात्रि का व्रत होता है।

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सुख ऐश्वर्य के साथ शिवलोक में स्थान के लिए

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श्रद्घालुओं को महाशिवरात्रि व्रत प्रातः काल से चतुर्दशी तिथि रहते रात्रि पर्यन्त तक करना चाहिए। रात्रि के चारों प्रहरों में भगवान शंकर की पूजा अर्चना करनी चाहिए। इस विधि से किए गए व्रत से जागरण पूजा उपवास तीनों पुण्य कर्मों का एक साथ पालन हो जाता है और भगवान शिव की विशेष अनुकम्पा प्राप्त होती है।

इससे व्यक्ति जन्मांतर के पापों से मुक्त होता है। इस लोक में सुख भोगकर व्यक्ति अन्त में शिव सायुज्य को प्राप्त करता है। जीवन पर्यन्त इस विधि से श्रद्धा विश्वास पूर्वक व्रत का आचरण करने से भगवान शिव की कृपा से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

जो लोक इस विधि से व्रत करने में असमर्थ हों वे रात्रि के आरंभ में तथा अर्द्धरात्रि में भगवान शिव का पूजन करके व्रत पूर्ण कर सकते हैं। यदि इस विधि से भी व्रत करने में असमर्थ हों तो पूरे दिन व्रत करके सांयकाल में भगवान शंकर की यथाशक्ति पूजा अर्चना करके व्रत पूर्ण कर सकते हैं। इस विधि से व्रत करने से भी भगवान शिव की कृपा से जीवन में सुख ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

महाशिवरात्रि की रात उन्नति एवं लाभ की प्राप्ति

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शिवरात्रि में संपूर्ण रात्रि जागरण करने से महापुण्य फल की प्राप्ति होती है। गृहस्थ जनों के अलावा संयासी लोगों के लिए महाशिवरात्रि की साधना एवं गुरूमंत्र दीक्षा आदि के लिए विशेष सिद्धिदायक मुहूर्त होता है।


अपनी गुरू परंपरा के अनुसार संयासी जन महारात्रि में साधना करते हैं। महाशिवरात्रि की रात्रि महा सिद्धिदात्री होती है। इस समय में किए गए दान पुण्य शिवलिंग की पूजा स्थापना का विशेष फल प्राप्त होता है।

इस सिद्ध मुहूर्त में पारद अथवा स्फटिक शिवलिंग को प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान के बाद अपने घर में अथवा व्यवसाय स्थल या कार्यालय में स्थापित करने से घर परिवार व्यवसाय और नौकरी में भगवान शिव की कृपा से विशेष उन्नति एवं लाभ की प्राप्ति होती है।

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