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महालक्ष्मी

Sat, 10 Nov 2012 01:01 PM IST
राकेश/इंटरनेट डेस्क।
राकेश/इंटरनेट डेस्क। Updated Sat, 10 Nov 2012 01:01 PM IST
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maha laxmi maa
समुद्र मंथन के समय जो भगवती लक्ष्मी प्रकट हुई थी वही देवी महालक्ष्मी हैं। महालक्ष्मी मां भगवान विष्णु की शक्ति और गृहलक्ष्मी हैं। माना जाता है कि दुर्वासा के शाप के कारण देवी लक्ष्मी सागर में प्रवेश कर गयी थी। सागर मंथन के समय इनका पुनर्जन्म हुआ।
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सागर से निकलने के बाद महालक्ष्मी ने भगवान विष्णु को देखा और अपने हाथ में वर माला लेकर विष्णु के गले में डाल दिया और पुनः विष्णु भगवान से लक्ष्मी का मिलन हुआ। महालक्ष्मी देवी की चार भुजाएं हैं। महालक्ष्मी का स्वरूप अलंकारों से पूर्ण और दिव्य है। इनके चार हाथों में कमल, पात्र, गदा और श्रीफल यानी नारियल है। इनकी उपासना धन-धान्य से समृद्ध करती है।
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मां लक्ष्मी के जितने भी स्वरूप हैं वह महालक्ष्मी माता के ही अंश हैं। महालक्ष्मी मां कमल पर पद्मासन मुद्रा में विराजमान रहती हैं। शंख, कौड़ी, कमल, मखाना, बताशा ये सभी महालक्ष्मी मां को प्रिय है। देवी महालक्ष्मी ही विष्णु भगवान के साथ दीपावली की रात उल्लू पर विराजमान होकर पृथ्वी पर भ्रमण करने आती हैं।
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