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संतान सुख देने वाली हैं मां स्कंदमाता

Fri, 19 Oct 2012 12:38 PM IST
राकेश/इंटरनेट डेस्क
राकेश/इंटरनेट डेस्क Updated Fri, 19 Oct 2012 12:38 PM IST
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ma skandmata helps bear child
नवरात्र के पांचवे दिन
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कुमार स्कंद की माता की पूजा होती है इसलिए देवी स्कंदमाता के नाम से जानी जाती हैं। यह देवी दुर्गा का ममतामयी रूप है। मां इस रूप में अपने गोद में बालक स्कंद को लिए हुए स्नेह की वर्षा कर रही हैं। जो भक्त मां के इस स्वरूप का ध्यान करता है उस पर मां ममता की वर्षा करती हैं और हर संकट एवं दुःख से भक्त को मुक्त कर देती है।

यह अद्भुत संयोग है कि दुर्गा मां का पांचवां रूप ममतामयी स्कंदमाता का है और ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जन्मपत्री का पंचम भाव संतान सुख का घर है। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस अद्भुत रहस्य को समझकर मां स्कंदमाता की पूजा अर्चना करता है मां उसकी गोद हमेशा भरी रखती हैं। संतान सुख की इच्छा से जो व्यक्ति मां स्कंदमाता की आराधना करना चाहते हैं उन्हें नवरात्र की पांचवी तिथि को लाल वस्त्र में सुहाग चिन्ह् सिंदूर, लाल चूड़ी, महावर, नेल पेंट, लाल बिन्दी तथा सेब और लाल फूल एवं चावल बांधकर मां की गोद भरनी चाहिए।

कन्या के साथ बटुक भोजन कराएं
स्कंदमाता को प्रसन्न करने के लिए स्कंद कुमार को खुश करना जरूरी है क्योंकि जबतक संतान खुश नहीं होगा मां खुश नहीं हो सकती है। मां को खुश करने के लिए पंचवी तिथि को पांच वर्ष की पांच कन्याओं एवं पांच बालकों को खीर एवं मिठाई खिलाएं। भोजन के पश्चात कन्याओं को लाल चुनरी एवं 5 रुपये दें तथा बालकों को एक सेब एवं 5 रुपये दें।

वाणी दोष से भी दिलाती हैं मुक्ति
कहते हैं कि गला एवं वाणी क्षेत्र पर स्कंदमाता का प्रभाव होता है। इसलिए जिन्हें गले में किसी प्रकार की तकलीफ अथवा वाणी दोष हैं उन्हें गंगाजल में पांच लवंग मिलाकर स्कंदमाता का आचमन कराना चाहिए और इसे प्रसाद स्वरूप पीना चाहिए। यह उपाय उनके लिए भी लाभकारी है जो गायकी, एंकरिंग अथवा अन्य वाणी से सम्बन्धित पेशे से जुड़े हुए हैं।
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