कुंभ 2019: 450 साल बाद मिला है मौका, संगम स्नान के बाद करना न भूलें इस दिव्य तीर्थ के दर्शन
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दिव्य कुंभ, भव्य कुंभ का शुभारंभ होने में बस कुछ ही दिन शेष है। 15 जनवरी मकर संक्रांति से कुंभ स्नान का महापर्व आरम्भ हो जाएगा। जहां पर देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु प्रयागराज की पावन धरती पर एकत्र होना प्रारंभ हो गया है। कुंभ मेले के सबसे बड़े आर्कषण नागा साधुओं का जत्था प्रयागराज में डेरा जमा चुके हैं। प्रयागराज में जितना महत्व तीन नदियों के संगम का है उतना ही महत्व संगम स्नान के बाद संगम तट पर किले के पास स्थित अक्षयवट का भी है। यह दिव्य वृक्ष अक्षयवट सैकड़ों वर्षों से आम नागरिको के लिए बंद था।
कुंभ से पहले कुछ दिन पहले प्रयागराज पहुंचे पीएम नरेन्द्र मोदी ने देश के करोड़ों सनातनधर्मियों की श्रद्धा भावना से जुड़े अक्षयवट तीर्थ को आम जनता के दर्शन के लिए खोलने का एलान किया। अक्षयवट सुरक्षा कारणों से लंबे समय से अकबर के किले में बंद था और साधु-संतों के अलावा श्रद्धालु इसके दर्शन-पूजन से वंचित थे।
प्रलय में भी नहीं नष्ट होता अक्षयवट
मनोरथ और मोक्षदायक वृक्ष
चीनी यात्री ह्वेनसांग ने इस वृक्ष का जिक्र किया
भारतीय सेना के कब्जे में है अक्षय वट का प्रांगण
कई बार अक्षय वट को जलाया और काटा गया
मुगल शासन के दौरान अक्षयवट को नष्य करने की काफी कोशिशे की थी। अक्षयवट को 23 बार काटा और जलाया गया लेकिन उसके कुछ माह बाद वह पुन: पुराने स्वरूप में आ जाता। इसके बाद इसके चारों ओर विशाल घेरा बनाया गया, ताकि उसके दर्शन को कोई न कर सके। तब से अक्षयवट कैद में था।