अधिकमास में जरूर करें दक्षिणावर्ती शंख की पूजा, होंगे कई फायदे
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हिन्दू धार्मिक कर्मकांड में शंख बजाने की परंपरा है। शंख को मांगलिक कार्यों, विवाह, धार्मिक अनुष्ठानों और रोजाना पूजा-पाठ में बजाने का नियम है। शास्त्रों में घर के पूजा स्थान में शंख का होना बेहद शुभ माना गया है। शंख बजाने का धार्मिक महत्व के साथ वैज्ञानिक महत्व भी है। शंख की ध्वनि वातावरण शुद्ध करती हैं। साथ ही इसको बजाने से कई तरह के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। आइए जानते हैं शंख का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व..
शंख का धार्मिक महत्व
कहा जाता है कि शंख की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी। शंख उन 14 रत्नों में से एक था जो समुद्र से निकले थे। विष्णु पुराण के अनुसार, शंख को माता लक्ष्मी जी का भाई माना गया है। इसलिए जिस घर में शंख होता है उस घर में लक्ष्मी माता का वास जरूर होता है। शास्त्रों में तीन प्रकार के शंख बताए गए हैं जिनमें पहला दक्षिणावृत्ति, दूसरा मध्यावृति और तीसरा वामवृत्ति है। इनमें दक्षिणावृत्ति शंख विष्णु जी को प्रिय है।
वैज्ञानिक दृष्टि से शंख का महत्व
वैज्ञानिक रूप से यह सिद्ध हो चुका है कि शंख की ध्वनि वातावरण में व्याप्त कीटाणुओं को नष्ट कर देती है। साल 1928 में बर्लिन विश्वविद्यालय ने इस संबंध में शोध पत्र प्रकाशित किया था। जिसमें शंख की ध्वनि को कीटाणुओं को नष्ट करने की औषिधि बताया गया था। इसके अलावा हकलाने की समस्या भी शंख को बजाने से दूर होती है। यह भी सिद्ध हो चुका है। शंख के और भी कई फायदे हैं..
वास्तु और फेंगशुई में शंख का महत्व
वास्तु और फेंगशुई के अनुसार, शंखनाद और शंख रखने के कई फायदे हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार शंख को नियमित रूप से बजाना सेहत के लिए बेहतर होता है। फिर चाहे वह छोटा शंख हो या बड़ा। मान्यता है कि शंख बजाने से हृदय संबंधी बीमारियां नहीं होती हैं।
घर में शंख रखना होता है बेहद शुभ
फेंगशुई के मुताबिक शंख रखना बेहद शुभ होता है। यह कार्यक्षेत्र में सुख-समृद्धि लेकर आता है। इसे रखने मात्र से ही व्यवसाय-व्यापार में वृद्धि होती है। शंख भगवान बुद्ध के पैरों में बने 8 शुभ चिन्हों में से एक है।