फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   kharmas 2021 dhanu sankranti sun transit in sagittarius auspicious work will stop for one month

Kharmas 2021: 15 दिसंबर से सूर्य धनु राशि में, होंगे खरमास आरम्भ, मांगलिक कार्यों पर एक माह के लिए विराम

Tue, 14 Dec 2021 07:34 AM IST
विनोद शुक्ला पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य, नई दिल्ली
पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 14 Dec 2021 07:34 AM IST
सार

धनु राशि में गोचर के मध्य सूर्य की शक्ति क्षीण और रश्मियां कमज़ोर पड़ जाती हैं। राशि स्वामी गुरु का तेज भी प्रभावहीन रहता है।

विज्ञापन
kharmas 2021 dhanu sankranti sun transit in sagittarius auspicious work will stop for one month
Kharmas 2021: 14 दिसंबर, 2021 से लेकर 14 जनवरी, 2022 तक खरमास लग रहा है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Kharmas 2021: 15 दिसंबर से सूर्य धनु राशि में, खरमास आरम्भ, मांगलिक कार्यों पर एक माह के लिए विरामसूर्यदेव 15 दिसंबर की मध्यरात्रि के बाद 03 बजकर 40 मिनट पर केतु के नक्षत्र 'मूल' और बृहस्पति की राशि 'धनु' में प्रवेश करेंगे, जिसके परिणामस्वरूप पौष संक्रांति आरम्भ हो जायेगी और मुंडन, ज्ञोपवीत, शादी-विवाह आदि जैसे मांगलिक कार्यों पर एक माह के लिए विराम लग जाएगा। 14 जनवरी 2022 को दोपहर 02 बजकर 27 मिनट सूर्यदेव के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही सूर्य उत्तरायण हो जाएंगे और पुनः सभी तरह के शुभकार्य आरम्भ हो जाएंगे। धनु राशि में गोचर के मध्य सूर्य की शक्ति क्षीण और रश्मियां कमज़ोर पड़ जाती हैं। राशि स्वामी गुरु का तेज भी प्रभावहीन रहता है। स्वभाव में उग्रता आ जाती है, तभी ज्योतिष ग्रन्थों में इस माह को खरमास कहा गया है। सूर्य सभी ग्रहों, राशियों, नक्षत्रों, संवत्सरों, योगों, करणों और मुहूर्तों के अधिपति हैं प्राणियों के शरीर की आत्मा एवं जगतात्मा हैं। जीव की उत्पत्ति में इनका प्रमुख योगदान रहता है।
विज्ञापन


विज्ञापन


धनु राशि की यात्रा के मध्य सूर्य की सेवा में उनके रथ के साथ अंशु और भग नाम के दो आदित्य, कश्यप और क्रतु नाम के दो ऋषि, महापद्म और कर्कोटक नाम के दो नाग, चित्रांगद तथा अरणायु नामक दो गन्धर्व सहा तथा सहस्या नाम की दो अप्सराएं, तार्क्ष्य एवं अरिष्टनेमि नामक दो यक्ष, आप तथा वात नामक दो राक्षस चलते हैं। उत्तम स्वास्थ्य, शिक्षा, संतान और यश की प्राप्ति, सामाजिक प्रतिष्ठा, प्रतियोगिता में सफलता व्यापार में कामयाबी और राज्यपद की लालसा रखने वाले, बेरोजगार नवयुवकों अथवा अधिकारिओं से प्रताडित लोगों को प्रातः लाल सूर्य की आराधना करनी चाहिए। बार-बार चोट लगती हो, शरीर में कैल्शियम की कमी हो, दुर्घटना के शिकार अधिक होते हों, अपनी हत्या का भय हो, यदि वे दोपहर 'अभिजीत' मुहूर्त में सूर्य की आराधना करें तो उन्हें जीवन पर्यंत इसका भय नहीं रहेगा। 
विज्ञापन
विज्ञापन


शायंकालीन सूर्य की आराधना करने से प्राणी को  जीवनपर्यंत अन्न-जल एवं भौतिक वस्तुओं का पूर्णसुख मिलता है। इनकी आराधना करने अथवा जल द्वारा अर्घ्यने से सभी दोष नष्ट हो जाते हैं पाप नाशक और पुण्य वृद्धि कारक भगवान सूर्य को इस मंत्र- 'सूर्यदेव महाभाग ! त्र्योक्य तिमिरापह। मम पूर्व कृतंपापं क्षम्यतां परमेश्वरः।को पढ़ते हुए अर्घ्य देने से आयु, विद्या बुद्धि और यश की प्राप्ति होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed