फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   kartik shukla dev pravodhni ekadashi vrat katha

इस एकादशी से मिलता है मोक्ष, देवता भी रखते हैं व्रत

Sat, 21 Nov 2015 04:16 PM IST
Updated Sat, 21 Nov 2015 04:16 PM IST
विज्ञापन
kartik shukla dev pravodhni ekadashi vrat katha

कार्तिक महीने की शुक्लपक्ष की एकादशी का बड़ा ही महत्व है। कहते हैं इस एकादशी के दिन व्रत पूजा करने वाले के कई जन्मों के पाप कट जाते हैं और व्यक्ति उत्तम लोक में जाने का अधिकारी बन जाता है।

विज्ञापन


इसलिए परलोक में उत्तम गति की इच्छा रखने वाले इस दिन भगवान विष्णु के लिए व्रत रखते हैं। इस एकादशी को लेकर ऐसी मान्यता भी है कि इसदिन देवतागण भी भगवान विष्णु के पास पहुंचकर उनके दर्शन का लाभ पाते हैं और व्रत पूजन करते हैं। आइये जानें इस एकादशी का क्या महत्व है और इसकी क्या कथा है।

विज्ञापन

इस तरह व‌िष्‍णु भगवान की पूजा से साल भर खुशहाली रहती है

kartik shukla dev pravodhni ekadashi vrat katha

कार्त‌‌िक शुक्ल एकादशी को शास्‍त्रों में देव उठानी एकादशी और देवप्रबोधनी एकादशी के नाम से बताया गया है। इसका कारण है क‌ि इस द‌िन इस दिन चार महीने शयन के बाद भगवान विष्णु जगते हैं।

शास्त्रों में बताया गया है कि देवप्रबोधनी एकादशी के दिन गन्ने का मंडप सजाकर मंडप के अंदर विधिवत रूप से भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से मांगलिक कार्यों में आने वाली बाधा दूर होती है और वर्ष सुखमय व्यतीत होता है।

सुख और मोक्ष के ल‌िए व‌िष्‍णु भगवान को प्रसन्न करने का आसान तरीका

kartik shukla dev pravodhni ekadashi vrat katha

जो लोग गन्ने का मंडप बनाकर विष्णु भगवान की पूजा नहीं कर पाते हैं उन्हें देवप्रबोधनी एकादशी के दिन निर्जल व्रत रखकर विष्णु भगवान की पूजा तथा विष्णु सहस्रनाम का जप करना चाहिए। इसके अलावा, इस दिन जितना संभव को विष्णु नाम का जप करना चाहिए।

शास्त्रों में बताया गया है कि देवप्रबोधनी एकादशी के दिन देवता भी भगवान विष्णु के जगने पर उनकी पूजा करते हैं। इसलिए पृथ्वी वासियों को भी इस दिन भगवान विष्णु के जगने पर उनकी पूजा करनी चाहिए।

पुराणों में बताया गया है कि जो लोग देवप्रबोधनी एकादशी का व्रत रखते हैं उनकी कई पीढ़ियां विष्णु लोक में स्थान प्राप्त करने के योग्य बन जाती हैं।

विज्ञापन

देव प्रबोधनी एकादशी व्रत व‌िध‌ि

kartik shukla dev pravodhni ekadashi vrat katha

देव प्रबोधनी एकादशी का व्रत रखने वाले व्यक्ति को दशमी के दिन से ही सात्विक आहार लेना चाहिए। एकादशी के दिन प्रातः स्नान करके भगवान विष्णु एवं लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए।

विष्णु भगवान को तुलसी का पत्ता चढ़ाएं। ध्यान रखें जो व्रत कर रहे हों उन्हें स्वयं तुलसी पत्ता नहीं तोड़ना चाहिए।

अपना काम करते हुए भगवान का ध्यान भी करें। शास्त्रों में एकादशी की रात में जागरण करके भगवान का भजन एवं जप करने का बड़ा महत्व बताया गया है।

इससे कई जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है। द्वादशी के दिन प्रातः भगवान विष्णु की पूजा के बाद ब्रह्मणों को भोजन कराएं। इसके बाद स्वयं तुलसी का पत्ता ग्रहण करें, फिर भोजन करें।

देवप्रबोधनी एकादशी व्रत कथा

kartik shukla dev pravodhni ekadashi vrat katha

शंखासुर नामक एक बलशाली असुर था। इसने तीनों लोकों में बहुत उत्पात मचाया। देवाताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु शंखासुर से युद्घ करने गए। कई वर्षों तक शंखासुर से भगवान विष्णु का युद्घ हुआ।

युद्घ में शंखासुर मारा गया। युद्घ करते हुए भगवान विष्णु काफी थक गए अतः क्षीर सागर में अनंत शयन करने लगे। चार माह सोने के बाद कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन भगवान की निद्रा टूटी।

देवताओं ने इस अवसर पर विष्णु भगवान की पूजा की। इस तरह देव प्रबोधनी एकादशी व्रत और पूजा का विधान शुरू हुआ।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed