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अहोई अष्टमी व्रतः जानिए महत्व और इसकी कथा

Thu, 16 Oct 2014 11:33 AM IST
राकेश झा/टीम डिजिटल
राकेश झा/टीम डिजिटल Updated Thu, 16 Oct 2014 11:33 AM IST
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kartik krishna ashtmi ahoi ashtmi vrat katha

गुरुवार 16 अक्तूबर को कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी है। शास्त्रों में इस अष्टमी को पुत्रवती माताओं के लिए बहुत ही खास बताया गया है। इसे अहोई अष्टमी के नाम से जाना जाता है। अहोई शब्द अनहोनी का अपभ्रंश है।

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ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से संतान की आयु लंबी होती है। इसलिए देश के कई भागों में इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र के लिए निर्जल व्रज रखती हैं।
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अहोई अष्टमी की कथा के अनुसार एक साहूकार था। साहूकार की बहुएं दीपावली में घर की मरम्मत के लिए वन में मिट्टी लाने जाती है। मिट्टी काटते समय छोटी बहू के हाथों अनजाने में कांटे वाले पशु साही के बच्चे की मृत्यु हो जाती है।
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नाराज साही श्राप देती है, जिससे छोटी बहू के सभी बच्चे मर जाते हैं। बच्चों को फिर से जीवित करने के लिए साहूकार की बहू साही और भगवती की पूजा करती है। इससे छोटी बहू की मृत संतान फिर से जीवित हो जाती है।


पुत्रवती माताएं साहूकार की छोटी बहू के समान अपने पुत्र की लंबी आयु और अनहोनी से रक्षा के लिए यह व्रत रखती हैं और साही माता एवं भगवती से प्रार्थना करती हैं कि उनके पुत्र दीर्घायु हों।

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