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कलयुग में यहां अवतार लेंगे भगवान
Updated Fri, 03 Aug 2012 04:34 PM IST
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भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है कि जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म का बोलबाला, तब-तब धर्म की स्थापना के लिए वह अवतार लेते हैं। कृष्ण विष्णु के आठवें अवतार माने जाते हैं। शास्त्रों में भगवान विष्णु के दस अवतारों का जिक्र मिलता है। इनमें से नौ अवतार हो चुके हैं अब कलियुग में भगवान का अंतिम अवतार होना बाकी है।
श्रीमद्भागवत पुराण के बारहवें स्कंद में लिखा है कि भगवान का कल्कि अवतार कलियुग की समाप्ति और सतयुग के संधि काल में होगा। शास्त्रों के अनुसार भगवान श्री राम और कृष्ण का अवतार भी अपने-अपने युग के अंतिम चरण में हुआ था।
श्रीमद्भागवत, स्कंध पुराण और कल्कि पुराण में ऐसा जिक्र मिलता है कि भगवान का अंतिम अवतार उत्तर प्रदेश में गंगा और रामगंगा के बीच बसे मुरादाबाद के संभल ग्राम में होगा। शास्त्रों में जिक्र किया गया है कि इस ग्राम में 68 तीर्थों का वास है। इन पुराणों में लिखे श्लोकों से ज्ञात होता है कि कल्कि भगवान का जन्म संभल ग्राम में विष्णुयश नाम के भगवान विष्णु के भक्त के घर होगा।
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बौध धर्म में कल्कि को विष्णु का अवतार नहीं माना गया है बल्कि यह बताया गया है कि भविष्य में संभल में कल्कि नाम का एक राजा होगा जो अधर्म का नाश कर लोगों को सत्य से अवगत कराकर धर्म का राज्य स्थापित करेगा।
गुरू गोविंद सिंह ने श्रीदशम नामक ग्रंथ में लिखा है कि भविष्य में भगवान का कल्कि अवतार होगा। भगवान का अवतार कश्मीर में बिशन दत्त नाम के ब्राह्मण के घर में होगा और 12 वर्ष की उम्र में इनकी शादी त्रिकोता नाम की कन्या से होगा।
कल्कि अवतार के समय के विषय में दक्षिण भारतीय ज्योतिषी बताते हैं कि इनके जन्म के समय चन्द्रमा धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में होगा। सूर्य तुला राशि में स्वाति नक्षत्र में होगा। गुरू स्वराशि धनु में और शनि अपनी उच्च राशि तुला में होगा।
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श्रीमद्भागवत पुराण के बारहवें स्कंद में लिखा है कि भगवान का कल्कि अवतार कलियुग की समाप्ति और सतयुग के संधि काल में होगा। शास्त्रों के अनुसार भगवान श्री राम और कृष्ण का अवतार भी अपने-अपने युग के अंतिम चरण में हुआ था।
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श्रीमद्भागवत, स्कंध पुराण और कल्कि पुराण में ऐसा जिक्र मिलता है कि भगवान का अंतिम अवतार उत्तर प्रदेश में गंगा और रामगंगा के बीच बसे मुरादाबाद के संभल ग्राम में होगा। शास्त्रों में जिक्र किया गया है कि इस ग्राम में 68 तीर्थों का वास है। इन पुराणों में लिखे श्लोकों से ज्ञात होता है कि कल्कि भगवान का जन्म संभल ग्राम में विष्णुयश नाम के भगवान विष्णु के भक्त के घर होगा।
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बौध धर्म में कल्कि को विष्णु का अवतार नहीं माना गया है बल्कि यह बताया गया है कि भविष्य में संभल में कल्कि नाम का एक राजा होगा जो अधर्म का नाश कर लोगों को सत्य से अवगत कराकर धर्म का राज्य स्थापित करेगा।
गुरू गोविंद सिंह ने श्रीदशम नामक ग्रंथ में लिखा है कि भविष्य में भगवान का कल्कि अवतार होगा। भगवान का अवतार कश्मीर में बिशन दत्त नाम के ब्राह्मण के घर में होगा और 12 वर्ष की उम्र में इनकी शादी त्रिकोता नाम की कन्या से होगा।
कल्कि अवतार के समय के विषय में दक्षिण भारतीय ज्योतिषी बताते हैं कि इनके जन्म के समय चन्द्रमा धनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में होगा। सूर्य तुला राशि में स्वाति नक्षत्र में होगा। गुरू स्वराशि धनु में और शनि अपनी उच्च राशि तुला में होगा।