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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Kajri Teej 2021 Vrat Katha in Hindi

Kajri Teej 2021 Vrat Katha: कजरी तीज व्रत कथा, जिसे सुनकर मिलता है अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद

Tue, 24 Aug 2021 07:19 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Tue, 24 Aug 2021 07:19 AM IST
सार

मान्यता के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि कजरी तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से पति की लंबी आयु और सुख समृद्धि की प्राप्ति के साथ मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं।

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Kajri Teej 2021 Vrat Katha in Hindi
कजरी तीज 2021: कजरी तीज व्रत कथा - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कजरी तीज 25 अगस्त बुधवार को है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, कजरी तीज हर साल भाद्रपद मास में कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि मनाई जाती है। तृतीया तिथि 24 अगस्त को शाम 4 बजकर 5 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन यानि 25 अगस्त की शाम 4 बजकर 18 मिनट पर समाप्त होगी। इस दिन सुहागिन महिलाओं के द्वारा अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखा जाता है। मान्यता के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि कजरी तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से पति की लंबी आयु और सुख समृद्धि की प्राप्ति के साथ मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं। हालांकि व्रती को इस इसका फल तभी प्राप्त होता है जब वह कजरी तीज की व्रत कथा का श्रवण या पाठन करती है। आइए जानते हैं क्या कजरी तीज की व्रत कथा-

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कजरी तीज व्रत कथा
एक गांव में एक ब्राह्मण रहता था जो बहुत गरीब था। उसके साथ उसकी पत्नी ब्राह्मणी भी रहती थी। इस दौरान भाद्रपद महीने की कजली तीज आई। ब्राह्मणी ने तीज माता का व्रत किया। उसने अपने पति यानी ब्राह्मण से कहा कि उसने तीज माता का व्रत रखा है। उसे चने का सतु चाहिए। कहीं से ले आओ। ब्राह्मण ने ब्राह्मणी को बोला कि वो सतु कहां से लाएगा। सातु कहां से लाऊं। इस पर ब्राह्मणी ने कहा कि उसे सतु चाहिए फिर चाहे वो चोरी करे या डाका डालें। लेकिन उसके लिए सातु लेकर आए। 
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रात का समय था। ब्राह्मण घर से निकलकर साहूकार की दुकान में घुस गया। उसने साहूकार की दुकान से चने की दाल, घी, शक्कर लिया और सवा किलो तोल लिया। फिर इन सब से सतु बना लिया। जैसे ही वो जाने लगा वैसे ही आवाज सुनकर दुकान के सभी नौकर जाग गए। सभी जोर-जोर से चोर-चोर चिल्लाने लगे। 
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इतने में ही साहूकार आया और ब्राह्मण को पकड़ लिया। ब्राह्मण ने कहा कि वो चोर नहीं है। वो एक एक गरीब ब्राह्मण है। उसकी पत्नी ने तीज माता का व्रत किया है इसलिए सिर्फ यह सवा किलो का सातु बनाकर ले जाने आया था। जब साहूकार ने ब्राह्मण की तलाशी ली तो उसके पास से सतु के अलावा और कुछ नहीं मिला।


उधर चांद निकल गया था और ब्राह्मणी सतु का इंतजार कर रही थी। साहूकार ने ब्राह्मण से कहा कि आज से वो उसकी पत्नी को अपनी धर्म बहन मानेगा। उसने ब्राह्मण को सातु, गहने, रुपए, मेहंदी, लच्छा और बहुत सारा धन देकर दुकान से विदा कर दिया। फिर सबने मिलकर कजली माता की पूजा की। जिस तरह से ब्राह्मण के दिन सुखमय हो गए ठीक वैसे ही कजली माता की कृपा सब पर बनी रहे।  

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