फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   importance of sankalpa in hindu puja path vidhi

पूजा शुरू करने से पहले क्यों लिया जाता है संकल्प ?

Thu, 28 May 2020 06:22 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 28 May 2020 06:22 AM IST
विज्ञापन
importance of sankalpa in hindu puja path vidhi
बिना संकल्प लिए किसी प्रकार की पूजा कभी भी पूर्ण नहीं मानी जाती है।

अगर विधि-विधान और सच्चे मन से किसी भगवान की पूजा की जाए तो मनोकामनाओं की पूर्ति जरूर होती है। किसी भी देवी-देवता या विशेष प्रयोजन में की जाने वाले पूजा आरंभ करने से पहले संकल्प लिया जाता है। बिना संकल्प के पूजा सफल नहीं मानी जाती। आइए जानते हैं पूजा में संकल्प लेने की उपयोगिता क्या है।

विज्ञापन


संकल्प का सामान्य मतलब किसी कार्य को करने का द्दढ निश्चय करना होता है। हिंदू धर्म में परंपरा होती है कि किसी भी तरह के पूजा-पाठ, अनुष्ठान या  शुभ कार्य करने से पहले संकल्प करना अति आवश्यक होता है। बिना संकल्प के कोई भी पूजा या शुभ कार्य अधूरा माना जाता है। पूजा में बिना संकल्प के पूजा करने से सारा फल इंद्रदेव को प्राप्त हो जाता है। इसलिए किसी भी तरह के पूजा में पंडित संकल्प करनावा नहीं भूलता है।
विज्ञापन


- बिना संकल्प लिए किसी प्रकार की पूजा कभी भी पूर्ण नहीं मानी जाती है। साथ ही पूजा का पूरा फल भी प्राप्त नहीं होता है। पूजा में संकल्प लेने का मतलब होता है कि अपने इष्टदेव और स्वयं को साक्षी मानकर पूजन कर्म को संपन्न करना।
विज्ञापन
विज्ञापन


- मान्यता है कि जिस पूजा में बिना संकल्प लिए पूजा कर्म किया जाता है उसका सारा फल देवराज इंद्र को चला जाता है। इसलिए पूजा में संकल्प जरूर लेना चाहिए।

- संकल्प भगवान गणेश के सामने लिया जाता है ताकि पूजा में किसी किसी प्रकार की कोई रुकावट न हो और पूजा संपन्न हो जाए। संकल्प लेते समय हाथ में जल लेकर पांच तत्वों अग्नि, पृथ्वी, आकाश, वायु और जल को साक्षी माना जाता है। एक बार संकल्प लेने पर पूजा करना आवश्यक होता है।


संकल्प लेने के बाद पूजा
- किसी भी पूजा, अनुष्ठान या शुभ कार्य में सबसे पहले भगवान गणेश को पूजा स्थल पर बैठाते है।

- हमेशा पूजन पूर्व की दिशा में मुंह करके करना चाहिए। पूर्व की दिशा में भगवान का वास होता है।

- पूजन कार्य संपन्न करने से पहले पूजन साम्रगी को अलग कर रखें। ताकि पूजन कार्य आरंभ होने में अनावश्यक व्यवधान उत्पन्न ना हो सके।

- अगर किसी कारण से भगवान गणेश की प्रतिमा उपलब्ध ना हो सके हो तो ऐसी दशा में एक सुपारी को पर कलावा लपेटकर चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उन्हें स्थापित कर देना चाहिए।



इन घरों में मां लक्ष्मी की जगह अपना डेरा डालती हैं गरीबी और दरिद्रता की देवी अलक्ष्मी

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed