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जलते हुए दीपक को बुझाने की सजा जानकर दहल जाएंगे

Sat, 29 Mar 2014 02:34 PM IST
Updated Sat, 29 Mar 2014 02:34 PM IST
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importance of deepdan in shastra puran

मंदिर में आपने भी कभी न कभी दिया जरुर जलाया होगा। अगर नहीं तो, अपनी आदत में इसे शामिल कर लीजिए। क्योंकि नियमित दीप जलाने का जो फायदा है वह किसी देवी-देवता की पूजा से कम नहीं है।

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दीपदान से बनी महारानी

importance of deepdan in shastra puran

इस संदर्भ में भविष्यपुराण में काशी की महारानी ललिता देवी की एक कथा है। इस कथा के अनुसार ललिता पूर्व जन्म में एक चुहिया थी। एक बार मंदिर में जलते दीये को देखकर खाने की चीज समझ बैठी।

दिये की बाती को मुंह में लगाकर जैसे ही चुहिया ले जाने लगी तभी बिल्ली की आवाज सुनाई दी। चुहिया बाती को जलता हुआ छोड़कर भाग गई। कुछ समय बाद चुहिये की मृत्यु हो गई।

अनजाने में दीपक जलाने का पुण्य मिल जाने से चुहिया को मनुष्य योनी प्राप्त हुआ और वह विदर्भ के राजा की पुत्री ललिता हुई। युवावस्था होने पर ललिता का विवाह काशी नरेश चारुधर्मा से हुआ। दीप दान के महत्व को जानकर ललिता इस जन्म में भी मंदिर, बाबरी और चौराहे पर दीपदान किया करती थी।


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ऐसा व्यक्ति अगले जन्म में काना और अंधा होता है

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भविष्य पुराण में बताया गया है कि जो व्यक्ति दीपदान करता है उसका जीवन सम्मान और धन से प्रकाशित होता रहता है। दीये की लौ की तरह व्यक्ति जीवन में और हर जन्म में ऊपर बढ़ता रहता है।

भूलकर भी जलते हुए दीपक को बुझाना नहीं चाहिए। जो दीपक को बुझाता है वह अगले जन्म में काना होता है। जो व्यक्ति दीपक चुराता है वह अगले जन्म में अंधा होता है। इसलिए जलते हुए दीपक को ईश्वर के समान आदर देना चाहिए।

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