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मन में जगने वाली काम भावनाओं के लिए खास है यह एकादशी

Mon, 30 Mar 2015 04:38 PM IST
Updated Mon, 30 Mar 2015 04:38 PM IST
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importance kamda ekadashi vrat katha

एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। शास्त्रों और पुराणों के अनुसार जो व्यक्ति साल में आने वाली कुल 24 एकादशी का व्रत रखता है वह धरती पर भोग और सुख प्राप्त करके मृत्यु के बाद उत्तम लोकों के स्थान पाने का अधिकारी बन जाता है।

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इसका कारण यह है कि सभी एकादशी का अलग-अलग महत्व और फल है। व्यक्ति अगर सभी एकादशी नहीं कर पाता है तो अपनी श्रद्घा और भावना के अनुसार जितनी इच्छा हो उतनी ही एकादशी का व्रत भी रख सकता है।
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यहां हम बात कर रहे हैं एक ऐसी एकादशी का जिनसे काम भावना के कारण हुए पापों से मुक्ति मिलती है। 24 एकादशी में से यह एकादशी व्रत हर साल चैत्र शुक्ल एकादशी तिथि को किया जाता है।
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इस वर्ष यह एकादशी गृहस्थों के लिए 31 मार्च को है। कारण यह है कि एकादशी तिथि का सूर्योदय 31 मार्च को हो रहा है। 30 मार्च को एकादशी तिथि है लेकिन सूर्योदय दशमी तिथि में है इसलिए यह व्रत 31 को मान्य होगा।

कामदा एकादशी कथाः मन में जगी काम भावना मिला भयानक शाप

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प्राचीन काल में भोगीपुर नगर में पुण्डरीक नामक नाग राज करता था। इनके दरबार में गायन और वादन में निपुण किन्नर व गंधर्व रहा करते थे। एक दिन ललित नाम का गन्धर्व दरबार में गायन कर रहा था।

अचानक उसे अपनी पत्नी की याद आ गई। इससे उसका स्वर, लय एवं ताल बिगड़ गया। इससे नाराज होकर पुण्डरीक ने ललित को राक्षस बन जाने का शाप दे दिया।

ललित के राक्षस बन जाने पर उसकी पत्नी ललिता दुःखी रहने लगी। एक दिन वन में ललिता को ऋष्यमूक ऋषि मिले। इन्होंने ललिता के दुःख को जानकर चैत्र शुक्ल एकादशी का व्रत करने की सलाह दी।

ललिता ने ऋषि के बताए नियम के अनुसार व्रत पूरा किया। इसके बाद व्रत का फल अपने पति ललित को दे दिया। इससे ललित वापस राक्षस से गंधर्व रुप में लौट आया। इस व्रत के पुण्य से ललित और ललिता दोनों को उत्तम लोक में भी स्थान प्राप्त हुआ।

कामदा एकादशी व्रत विधि

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शास्त्रों में इस एकादशी व्रत के जो नियम बताए गए हैं उसके अनुसार। एकादशी के दिन स्नानादि से पवित्र होने के बाद संकल्प करके श्री विष्णु के विग्रह की पूजन करें।

विष्णु भगवान को फूल, फल, तिल, दूध, पंचामृत आदि नाना पदार्थ अर्पित करें। आठों प्रहर निर्जल रहकर विष्णु जी के नाम का स्मरण एवं कीर्तन करना चाहिए।

अगर आपके पास समय का अभाव हो तब मानसिक भजन कीर्तन भी कर सकते हैं। मानसिक भजन कीर्तन में आप अपना काम करते हुए मन ही मन भगवान का ध्यान करते रहें।

एकादशी व्रत में ब्राह्मणो को भोजन एवं दक्षिणा का बड़ा ही महत्व है। एकादशी का ब्रह्मण भोजन द्वादशी तिथि को होता है। इसलिए द्वादशी तिथि के दिन ब्राह्मणों को भोजन करवाकर दक्षिणा सहित विदा करें।

इसके बाद स्वयं भोजन ग्रहण करें। इस प्रकार जो चैत्र शुक्ल पक्ष में एकादशी का व्रत रखता है उसकी कामना पूर्ण होती है और काम भावना के कारण हुए पापों से मुक्ति मिलती है।

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