जहां शरीर का त्याग करने से मिलता है सीधा मोक्ष
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शास्त्रों में कहा गया है कि आत्मा का अंतिम लक्ष्य परमात्मा से मिलन है। इसके लिए ही आत्मा एक शरीर से दूसरे शरीर में भटकती रहती है। धर्मग्रंथों में मोक्ष पाने के लिए कई विधि और व्रत बताए गए हैं।
इसके अलावा कुछ स्थानों का भी उल्लेख किया गया है जहां शरीर का त्याग करने से आत्मा को आवागमन के चक्र से मुक्ति मिल जाती है और आत्मा सीधा परमात्मा से मिल जाता है।
इसलिए इन स्थानों पर देह त्याग करने की कामना सभी करते हैं। लेकिन बड़े भाग्यशाली लोगों को ही यहां शरीर त्याग का सौभाग्य मिलता है।
यहां यमराज कदम भी नहीं रख सकते
काशी के विषय में कहा जाता है कि यह भगवान शिव के त्रिशूल पर बसा हुआ है। शिव जी ने काल भैरव को काशी का कोतवाल बनाया है। यहां पर यमराज और उनके दूतों का प्रवेश वर्जित है। इसलिए यहां देहत्याग करने वाला नर्क नहीं जाता।
मान्यता है कि धर्म नगरी काशी में जो देह त्याग करते हैं उनके अच्छे बुरे कर्मों का फैसला काल भैरव करते हैं। काल भैरव के दंड से मुक्त होने के बाद देह त्याग करने वाले की आत्मा परमात्मा से मिल जाती है।
धरती पर बैकुंठ धाम
भगवान विष्णु जहां निवास करते हैं उसे बैकुंठ कहा गया है। धरती पर एक स्थान ऐसा है जिसके विषय में कहा जाता है कि 6 महीने भगवान इस स्थान पर निवास करते हैं। इसलिए इसे धरती का बैकुंठ कहा गया है।
यह स्थान है बद्रीनाथ तीर्थ। इस स्थान पर जो व्यक्ति देह त्याग करता है उसकी आत्मा का मिलन परमात्मा से हो जाता है। अकाल मृत्यु के कारण जिस व्यक्ति की आत्मा भटकती रहती है उनका अंतिम संस्कार भी अगर बद्रीनाथ में किया जाता है तो उसे भी मुक्ति मिल जाती है।
हरि के धाम पहुंचने का द्वार
हरि का पृथ्वी पर धाम बद्रीनाथ है तो उस धाम तक पहुंचने का द्वार है हरिद्वार। यहां भगवान शिव के शीष से उतरकर विष्णु के चरणों को पखारती हुई गंगा पहली बार मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करती है। हरिद्वार को शास्त्रों में कनखल क्षेत्र भी कहा जाता है, जहां देवी सती के पिता ने महायज्ञ किया था।
यहीं यज्ञ की अग्नि कुंड में प्रवेश करके सती ने आत्मदाह किया था। यह भूमि तपोभूमि कहलाती है। यहां से कुछ ही दूरी पर सप्तऋषियों ने तपस्या की थी। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि यहां गंगा तट पर जो व्यक्ति प्राण त्याग करते हैं उन्हें सीधा विष्णु के परमधाम में स्थान मिलता है।
महाश्मशान भगवान शिव का धाम
उत्तराखंड की पवित्र भूमि पर बसा है केदारखंड जहां भगवान शिव का पावन धाम केदारनाथ स्थित है। यह महाश्मशान भूमि है। महाशिवरात्रि की कथा में उल्लेख मिलता है कि इस क्षेत्र में जिस किस भी जीव का देह त्याग होता है वह वह सीधा शिव के गणों द्वारा शिवलोक ले जाए जाते हैं।
प्राचीन काल में इसी मान्यता के कारण जीवन के मोह से मुक्त हो चुके लोग केदानाथ और बद्रीनाथ की यात्रा किया करते थे। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति केदानाथ और बद्रीनाथ की यात्रा कर लेता है वह जीवन मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है।
चारो धाम की स्थापना करने वाले भगवान शिव के अंशअवतार शंकराचार्य ने यहीं देह त्याग किया था।
जहां देह त्याग करने से मिलता है नर्क
उत्तरप्रदेश के कबीर नगर में स्थित है मगहर नामक स्थान। इस स्थान के विषय में मान्यता है कि जो व्यक्ति यहां देह त्याग करता है उसे नर्क में स्थान मिलता है। ऐसे व्यक्ति को गदहे के रुप में पुनर्जन्म लेना पड़ता है।
लेकिन महान संत कबीरदास जिन्होंने अपना पूरा जीवन धर्म नगरी काशी में बिताया देह त्याग से पहले इन्होंने काशी को छोड़कर मगहर को अपना ठिकाना बनाया। यहीं इन्होंने अपना देह त्याग किया।