Govardhan Puja 2020: गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने का महत्व, परिक्रमा के समय सावधानियां बरतना जरूरी
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कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गोवर्धन (गिरीराज भगवान) पूजा की जाती है। इस वर्ष गोवर्धन का त्योहार 15 नवंबर को मनाया जाएगा। कथाओं के अनुसार गोवर्धन पूजा द्वापर युग से चली आ रही है। कृष्ण जी ने ब्रजवासियों की रक्षा करने के लिए 7 दिनों तक अपनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठा कर रखा था। गोवर्धन पूजा के दिन गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर पूजन किया जाताहै। इस दिन गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा का विशेष महत्व माना जाता है। गोवर्धन भगवान और कृष्ण जी की विशेष कृपा पाने के लिए लोग इस दिन गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करते हैं। लोग गोवर्धन की परिक्रमा के समय कुछ गलतियां कर देते हैं, जिससे उन्हें पूरी कृपा नहीं मिल पाती है। परिक्रमा करते समय की गई कुछ गलतियों के कारण लोग पाप के भागीदार भी बनते हैं, इसलिए गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करते हुए नियमों का पालन करना बहुत आवश्यक माना गया है। जानते हैं।
गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा से जुड़े नियम
- परिक्रमा प्रारंभ करने से पहले गोवर्धन पर्वत को प्रणाम करें और ध्यान रखें कि किस स्थान से आपने परिक्रमा आरंभ की है। गोवर्धन की परिक्रमा जिस स्थान से आरंभ करते हैं, उसी स्थान पर समाप्त करते हैं।
- अगर आपको गोवर्धन परिक्रमा आरंभ करनी है तो पहले मानसी गंगा में स्नान अवश्य कर लेना चाहिए। अगर गंगा में स्नान करना संभव न हो तो हाथ मुंह धोकर भी परिक्रमा आरंभ की जा सकती है।
- अगर आप गोवर्धन की परिक्रमा करते हैं तो उसे पूरा अवश्य करें। परिक्रमा को बीच में कभी अधूरा छोड़ने की गलती न करें। अगर किसी विशेष कारण से आपको परिक्रमा अधूरी छोड़नी पड़े तो गोवर्धन भगवान और कृष्ण जी से क्षमा प्रार्थना करने के पश्चात ही परिक्रमा छोड़े।
- गोवर्धन पर्वत की पूजा करते समय भगवान के नाम का स्मरण करते हुए परिक्रमा करें। सांसारिक बातों की ओर ध्यान न दें, क्योंकि पवित्र मन से की गई परिक्रमा ही फलदायी होती है।
- अगर आप शादी-शुदा हैं तो अपने जीवनसाथी के साथ ही परिक्रमा करनी चाहिए। इससे आप दोनों को गोवर्धन भगवान का आशीर्वाद मिलता है।
- गोवर्धन की परिक्रमा करते समय पवित्रता का ध्यान रखना आवश्यक होता है, इसलिए भूलकर भी किसी नशीली चीज या फिर धुम्रपान का सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से आप पाप के भागीदार बनते हैं।
- गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा इस तरह से आरंभ करें कि परिक्रमा करते समय गोवर्धन पर्वत आपके दाहिनी ओर रहे। शास्त्रों में कहा गया है कि जिसकी भी हम परिक्रमा करते हैं, वह वस्तु हमारी दांयी ओर होनी चाहिए, अन्यथा परिक्रमा उल्टी मानी जाती है।