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घंटयाली माता, जो करती हैं सीमाओं की रक्षा
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क।
Updated Thu, 17 Jan 2013 11:32 AM IST
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1965 में हुए भारत पाकिस्तान युद्ध
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में पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर क्षेत्र में पाकिस्तानी सेना को परास्त करने तनोट
माता की भूमिका बड़ी अहम मानी जाती है। यहां तक मान्यता है कि माता ने सैनिकों की
मदद की और पाकिस्तानी सेना को पीछे हटना पड़ा। इस घटना की याद में तनोट माता मंदिर
के संग्रहालय में आज भी पाकिस्तान द्वारा फेंके गये जीवित बम रखे गये हैं।
तनोट माता की तरह ही इस क्षेत्र में घंटयाली माता की ख्याति है। घंटयाली माता ने भी सैनिकों की सहायता की थी और तनोट माता की तरह ही इनके परिसर में भी दागे गये गोले और बम फटे नहीं। यही कारण है कि भारतीय सैनिक इन मंदिरों के प्रति गहरी आस्था रखते हैं। घंटयाली माता मंदिर में सुबह शाम की पूजा भी सैनिक ही करते हैं। आस-पास के क्षेत्र में घंटयाली माता की बड़ी ख्याति है, लोग यहां अपनी मुरादें मांगने भी आते हैं।
मान्यता है कि माता सदैव अपने मंदिर में निवास करती हैं और अपने भक्तों की पुकार सुनती हैं। घंटयाली माता की एक प्राचीन कथा है जो मंदिर की दीवार पर लिखी हुई है। कथा के अनुसार सीमावर्ती गांवों के लोगों पर कुछ लोगों ने अत्याचार करना शुरू कर दिया। गांव के एक परिवार के सभी सदस्यों को अपराधियों ने मार दिया। संयोगवश एक महिला जीवित रह गयी और गांव छोड़कर अन्य स्थान पर चली गयी।
इस दौरान महिला गर्भवती थी और कुछ समय बाद इसने एक पुत्र को जन्म दिया। बड़ा होने पर मां ने अपने पुत्र को सारी घटना बतायी। अपने परिवार वालों पर हुए अत्याचार के बारे में जानकर लड़के ने अत्याचारियों से बदला लेने की ठान ली। यह तलवार लेकर अपने पैतृक गांव लौट आया। रास्ते में घंटयाली माता का मंदिर मिला। यहां माता ने एक छोटी बच्ची के रूप में लड़के को दर्शन दिया और पानी पिलाया। माता ने कहा कि तुम बस एक व्यक्ति को मारना बाकि सब अपने आप मर जाएंगे।
लड़के ने कहा कि यदि ऐसा हो जाएगा तो मैं वापस लौटकर अपना सिर आपके चरणों में चढ़ा दूंगा। माता के आदेश के अनुसार लड़का गांव में पहुंचा तो देखा कि एक बारात जा रही है। उसने पीछे से एक व्यक्ति को मार दिया। इसके बाद सभी लोग आपस में उलझ गये और एक-दूसरे को मारने लगे। लड़का लौटते समय माता के मंदिर में गया और माता को पुकारने लगा। माता प्रकट नहीं हुई तब लड़का अपना सिर काटकर माता के चरणों में रखने के लिए तलवार उठा लिया।
इसी समय माता प्रकट हुई और लड़के का हाथ पकड़ कर बोली 'मैं तो यहीं विराजमान हूं, मैं अपने भक्तों को दर्शन देकर आगे भी कृतार्थ करती रहूंगी।' इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में घंटयाली माता की प्रसिद्धि फैल गयी।
तनोट माता की तरह ही इस क्षेत्र में घंटयाली माता की ख्याति है। घंटयाली माता ने भी सैनिकों की सहायता की थी और तनोट माता की तरह ही इनके परिसर में भी दागे गये गोले और बम फटे नहीं। यही कारण है कि भारतीय सैनिक इन मंदिरों के प्रति गहरी आस्था रखते हैं। घंटयाली माता मंदिर में सुबह शाम की पूजा भी सैनिक ही करते हैं। आस-पास के क्षेत्र में घंटयाली माता की बड़ी ख्याति है, लोग यहां अपनी मुरादें मांगने भी आते हैं।
मान्यता है कि माता सदैव अपने मंदिर में निवास करती हैं और अपने भक्तों की पुकार सुनती हैं। घंटयाली माता की एक प्राचीन कथा है जो मंदिर की दीवार पर लिखी हुई है। कथा के अनुसार सीमावर्ती गांवों के लोगों पर कुछ लोगों ने अत्याचार करना शुरू कर दिया। गांव के एक परिवार के सभी सदस्यों को अपराधियों ने मार दिया। संयोगवश एक महिला जीवित रह गयी और गांव छोड़कर अन्य स्थान पर चली गयी।
इस दौरान महिला गर्भवती थी और कुछ समय बाद इसने एक पुत्र को जन्म दिया। बड़ा होने पर मां ने अपने पुत्र को सारी घटना बतायी। अपने परिवार वालों पर हुए अत्याचार के बारे में जानकर लड़के ने अत्याचारियों से बदला लेने की ठान ली। यह तलवार लेकर अपने पैतृक गांव लौट आया। रास्ते में घंटयाली माता का मंदिर मिला। यहां माता ने एक छोटी बच्ची के रूप में लड़के को दर्शन दिया और पानी पिलाया। माता ने कहा कि तुम बस एक व्यक्ति को मारना बाकि सब अपने आप मर जाएंगे।
लड़के ने कहा कि यदि ऐसा हो जाएगा तो मैं वापस लौटकर अपना सिर आपके चरणों में चढ़ा दूंगा। माता के आदेश के अनुसार लड़का गांव में पहुंचा तो देखा कि एक बारात जा रही है। उसने पीछे से एक व्यक्ति को मार दिया। इसके बाद सभी लोग आपस में उलझ गये और एक-दूसरे को मारने लगे। लड़का लौटते समय माता के मंदिर में गया और माता को पुकारने लगा। माता प्रकट नहीं हुई तब लड़का अपना सिर काटकर माता के चरणों में रखने के लिए तलवार उठा लिया।
इसी समय माता प्रकट हुई और लड़के का हाथ पकड़ कर बोली 'मैं तो यहीं विराजमान हूं, मैं अपने भक्तों को दर्शन देकर आगे भी कृतार्थ करती रहूंगी।' इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में घंटयाली माता की प्रसिद्धि फैल गयी।