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इस गंगा दशहरा का है खास महत्व, ये काम करेंगे तो सभी पापों से मिल जाएगी मुक्ति

Thu, 24 May 2018 11:39 AM IST
डॉ. प्रतीक मिश्रापुरी, ज्योतिषाचार्य
डॉ. प्रतीक मिश्रापुरी, ज्योतिषाचार्य Updated Thu, 24 May 2018 11:39 AM IST
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Ganga Dussehra 2018- ganga bath is auspicious

ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष दशमी को गंगा दशहरा मनाया जाता है। इस बार यह 24 मई को है। इस वर्ष इसकी महिमा इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि पुरुषोत्तम (मलमास) माह भी चल रहा है। ज्योतिष के अनुसार, सूर्य की वृष और चंद्रमा की कन्या राशि में गंगा का हिमालय से निर्गमन हुआ था। पौराणिक ग्रंथ श्रीमद्भागवत गीता और महाभारत आदि में इसका विस्तार से वर्णन है।

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विष्णु पुराण में कहा गया है कि गंगा का नाम लेने, सुनने, उसे देखने, उसका जल ग्रहण करने और उसमें स्नान करने से मनुष्य के जन्मों-जन्मों के पाप समाप्त हो जाते हैं। इस बार गंगा दशहरा पुरूषोत्तम मास में ही मनाया जाएगा। इससे लोगों के मन में प्रश्न उठता है कि जब कोई शुभ कार्य इस माह में नहीं होता है, तो गंगा दशहरा क्यों ? पुराणों में वर्णित आख्यान के अनुसार, पूर्वाह्न व्यापिनी ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को हस्त नक्षत्र में जब दस योग विद्यमान थे, तब गंगाजी का आगमन स्वर्ग से पृथ्वी पर हुआ था। हमारे शास्त्रों ने प्रत्येक वाद का समाधान किया है। शास्त्रों के अनुसार, जब दो ज्येष्ठ मास हों, तो गंगा दशहरा मलमास में ही मनाया जाए। इसके पीछे एक पौराणिक कथा भी है। 
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जब राजा परीक्षित ने मरा हुआ सांप ऋषि के गले में डाल दिया था, तो घर वापिस आकर उन्हें अपने किए पर पश्चाताप हुआ। अपने पाप का प्रायश्चित करने के लिए उन्होंने गंगा स्नान का निर्णय लिया। उस समय मलमास चल रहा था। उन्होंने मलमास को छोड़कर, ज्येष्ठ गंगा दशहरे का इंतजार किया तथा पूरे पुरूषोत्तम मास में भागवत का ध्यान किया। राजा परीक्षित के मरने के बाद ऋषि ने स्वयं कहा कि गंगा दशहरा जो मलमास में था, यदि परीक्षित उसमें स्नान करते, तो समस्त पापों से मुक्त हो सकते थे, परंतु उन्होंने शुद्ध ज्येष्ठ का इंतजार किया। तभी से गंगा दशहरा मलमास होने पर, मलमास में ही मनाया जाता है न कि शुद्ध ज्येष्ठ मास में।

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Ganga Dussehra 2018- ganga bath is auspicious

आज के दिन गंगा में दस प्रकार के योग रहते हैं तथा गंगाजी दस प्रकार के पापों का शमन करती हैं । ये दस योग हैं ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, दशमी तिथि, बुधवार, हस्त नक्षत्र, व्यतिपात योग, गरकरण, आनंद योग, कन्या राशि, गत चंद्रमा, वृष राशि में रवि। अधिकमास में यह योग फलीभूत हो जाते हैं। 

अधिकमास में हरिद्वार में गंगा स्नान करने से, पूर्व में किए गए पापों का शमन होता है। आज के दिन ‘ओम् नमः शिवाय नारायण्यै दशहरायै गंगायै नमः’ मंत्र का जाप करने से समस्त पापों का क्षय तुरंत हो जाता है। गंगा में दस प्रकार के फल, दस प्रकार के पुष्प, दस प्रकार के वस्त्र, दस प्रकार की मिठाई, दस प्रकार का भोजन अर्पण करने से समस्त प्रकार के सुखों की प्राप्त होती है। 

स्कंदपुराण के अनुसार, गंगा दशहरा पर गंगा नदी पर जाकर स्नान, ध्यान तथा दान करना चाहिए। इस दिन गंगा स्तोत्र जरूर पढ़ना चाहिए। आज के दिन स्नान के बाद दान का विशेष महत्व बताया गया है। 

इस दिन छाता, सूती वस्त्र, टोपी-अंगोछा, जूते-चप्पल आदि दान में जरूर देने चाहिए। इससे जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। आज के दिन दान करने से ग्रहदोष दूर हो जाते हैं आैर जीवन में शांति आती है। अगर आप गंगा नदी पर नहीं जा सकते, तब घर के पास किसी नदी या तालाब में गंगा मैया का ध्यान करते हुए ‘गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती। नर्मदे सिन्धु कावेरी जले अस्मिन् सन्निधिम् कुरु। का पाठ करने से लाभ होता है। 

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