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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Ganesh Chaturthi 2021 Why Is Lord Ganesha Worshiped First Know Katha And Significance

Ganesh Chaturthi 2021: किसी भी पूजा और शुभ कार्य में सबसे पहले क्यों पूजे जाते हैं भगवान गणेश ? जानिए कथा

Wed, 08 Sep 2021 12:32 PM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन ,वास्तुविद
अनीता जैन ,वास्तुविद Published by: विनोद शुक्ला Updated Wed, 08 Sep 2021 12:32 PM IST
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Ganesh Chaturthi 2021  Why Is Lord Ganesha Worshiped First Know Katha And Significance
Ganesh Chaturthi 2021: 10 सितंबर, शुक्रवार को विनायक चतुर्थी है। इसे कलंक चतुर्थी, गणेश चौथ, डंडा चौथ और शिवा चतुर्थी भी कहा जाता है। - फोटो : अमर उजाला

वैसे तो प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि भगवान गणेशजी के पूजन और उनके नाम का व्रत रखने का विशेष दिन है, लेकिन भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि को गणेशजी के सिद्धि विनायक स्वरूप की पूजा की जाती है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन गणेशजी दोपहर में अवतरित हुए थे, इसलिए यह गणेश चतुर्थी विशेष फलदायी बताई जाती है। पूरे देश में यह त्योहार गणेशोत्सव के नाम से प्रसिद्ध है लोक भाषा में इस त्योहार को डण्डा चौथ भी कहा जाता है।

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ऐसे बने अग्रपूज्य देवता
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार माता पार्वती ने स्न्नान के लिए जाने से पूर्व अपने शरीर के मैल से एक सुंदर बालक को उत्पन्न किया और उसे गणेश नाम दिया। पार्वतीजी ने उस बालक को आदेश दिया कि वह किसी को भी अंदर न आने दे, ऐसा कहकर पार्वती जी अंदर नहाने चली गईं। जब भगवान शिव वहां आए ,तो बालक ने उन्हें अंदर आने से रोका और बोले अन्दर मेरी मां नहा रही हैं, आप अन्दर नहीं जा सकते। शिवजी ने गणेशजी को बहुत समझाया, कि पार्वती मेरी पत्नी है। पर गणेशजी नहीं माने। तब शिवजी को बहुत गुस्सा आया और उन्होंने गणेशजी की गर्दन अपने त्रिशूल से काट दी और अन्दर चले गये, जब पार्वतीजी ने शिवजी को अन्दर देखा तो बोली कि आप अन्दर कैसे आ गए। मैं तो बाहर गणेश को बिठाकर आई थी। तब शिवजी ने कहा कि मैंने उसको मार दिया। तब पार्वती जी रौद्र रूप धारण कर लिया और कहा कि जब आप मेरे पुत्र को वापस जीवित करेंगे तब ही मैं यहां से चलूंगी अन्यथा नहीं। शिवजी ने पार्वती जी को मनाने की बहुत कोशिश की पर पार्वती जी नहीं मानी। सारे देवता एकत्रित हो गए सभी ने पार्वतीजी को मनाया पर वे नहीं मानी। 
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तब शिवजी ने विष्णु भगवान से कहा कि किसी ऐसे बच्चे का सिर लेकर आये जिसकी मां अपने बच्चे की तरफ पीठ करके सो रही हो। विष्णुजी ने तुरंत गरूड़ जी को आदेश दिया कि ऐसे बच्चे की खोज करके तुरंत उसकी गर्दन लाई जाये। गरूड़ जी के बहुत खोजने पर एक हथिनी ही ऐसी मिली जो कि अपने बच्चे की तरफ पीठ करके सो रही थी। गरूड़ जी ने तुरंत उस बच्चे का सिर लिया और शिवजी के पास आ गये। शिवजी ने वह सिर गणेश जी को लगाया और गणेशजी को जीवनदान दिया, साथ ही यह वरदान भी दिया कि आज से कही भी कोई भी पूजा होगी उसमें गणेशजी की पूजा सर्वप्रथम होगी। इसलिए हम कोई भी कार्य करते हैं तो उसमें हमें सबसे पहले गणेशजी की पूजा करनी चाहिए, अन्यथा पूजा सफल नहीं होती।  
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इन नामों को स्मरण करने से विघ्न रहेंगे दूर
गणेश जी का महत्व भारतीय धर्मों में सर्वोपरि है, उन्हें हर नए कार्य, हर बाधा या विघ्न के समय में बड़ी उम्मीद से याद किया जाता है। गणेशजी को देव समाज में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। गणेश का वाहन चूहा है इनकी दो पत्नियां भी हैं जिन्हें रिद्वि और सिद्वि के नाम से जाना जाता है। इनका सर्वप्रिय भोग मोदक यानी लड्डू है। माता पिता भगवान शंकर व पार्वती भाई श्री कार्तिकेय एवं बहन अशोक सुन्दरी हैं। गणेश जी के अनेक नाम हैं लेकिन ये 12 नाम प्रमुख है- समुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लंबोदर, विकट, विघ्न-नाशक , विनायक, धूमकेतु, गणाध्यक्ष, भालचंद्र, गजानन।


विद्यारम्भ तथा विवाह के पूजन के समय इन नामों से गणपति की आराधना का विधान हैं। भगवान गणेश के अति शुभ बारह नामों का नित्य स्मरण करने वाले व्यक्ति को जीवन में किसी भी प्रकार के संकटों का सामना नहीं करना पड़ता है। विद्या अध्ययन, विवाह के समय, यात्रा, रोजगार के शुभारम्भ में या अन्य किसी भी शुभ कार्य को करते समय गणेश के बारह नाम लेने से कार्यो की अड़चनें दूर हो जाती है।

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