{"_id":"6138af5f8ebc3e882b724fbe","slug":"ganesh-chaturthi-2021-ganesh-utsav-start-from-10-september-know-lord-ganesh-story","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ganesh Chaturthi 2021: 10 सितंबर से गणेशोत्सव शुरू, जानिए भगवान गणेश के बारे में कुछ खास बातें...","category":{"title":"Religion","title_hn":"धर्म","slug":"religion"}}
Ganesh Chaturthi 2021: 10 सितंबर से गणेशोत्सव शुरू, जानिए भगवान गणेश के बारे में कुछ खास बातें...
Thu, 09 Sep 2021 06:31 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 09 Sep 2021 06:31 AM IST
सार
भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। गणेश पुराण के अनुसार इसी दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था।
विज्ञापन
Ganesh Chaturthi 2021: 10 सितंबर, शुक्रवार को विनायक चतुर्थी है। इसे कलंक चतुर्थी, गणेश चौथ, डंडा चौथ और शिवा चतुर्थी भी कहा जाता है।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
10 सितंबर 2021 से गणेशोत्सव का त्योहार आरंभ होने जा रहा है। किसी भी शुभ काम को करने से पहले गणेशजी की पूजा सबसे पहले होती है इसलिए भगवान गणेश को आदिपूज्य भी कहते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष गणेश चतुर्थी का त्योहार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर मनाया जाता है। इस दिन घरों और बड़े-बड़े पूजा पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की जाती है। गणेश चतुर्थी को विनायक चतुर्थी, कलंक चतुर्थी और डंडा चौथ भी कहा जाता है। गणेश चतुर्थी के मौके पर आइए जानते हैं भगवान गणेश जी जुड़ी कुछ खास बातें....
1- भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। गणेश पुराण के अनुसार इसी दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था।
2- गणेश चतुर्थी महाराष्ट्र का सबसे बड़ा त्योहार है। यहां दस दिनों तक गणेश महोत्सव मनाया जाता है।
3- भगवान गणेश ऐसे देवता हैं जो भौतिक और आध्यात्मिक दोनों तरह के फल देते हैं।
4- गणेश चतुर्थी की पूजा करने से व्यक्ति के 21 तरह के दुखों का नाश होता है।
5- भगवान गणेश को दूर्वा बहुत ही प्रिय होती है। दूर्वा चढ़ाने से हर किसी की मनोकामना पूरी होती है।
6- भगवान गणेश का वाहन चूहा है और बैठे रहने की आदत है।
7- किसी भी शुभ कार्य में सबसे पहले पूजा भगवान गणेश की होती है।
8- चतुर्थी तिथि, स्वस्तिक का चिन्ह, मोदक और लाल रंग के फूल इन्हें बहुत ही प्रिय होता है।
9- पूर्व की दिशा और लेखन में भगवान गणेश की रुचि है।
10- मनोकामनों की पूर्ति भगवान गणेश बहुत ही जल्दी करते हैं।
11- गणों के स्वामी होने के कारण उनका नाम गणपति है।
12- ज्योतिष में गणेश केतु का देवता माना जाता है।
13 - गणेश जी 12 नाम प्रमुख हैं सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लंबोदर, विकट, विघ्न-नाश, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचंद्र, गजानन
14- गणेश जी के पिता- भगवान शंकर, माता- भगवती पार्वती, भाई- श्री कार्तिकेय (बड़े भाई), बहन- -अशोकसुन्दरी, पत्नी- ऋद्धि और सिद्धि, पुत्र दो शुभ और लाभ
15- गणेश चतुर्थी उत्सव शिवाजी के समय में एक सार्वजनिक समारोह के रूप में मनाया जाता था।
विज्ञापन
1- भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। गणेश पुराण के अनुसार इसी दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था।
2- गणेश चतुर्थी महाराष्ट्र का सबसे बड़ा त्योहार है। यहां दस दिनों तक गणेश महोत्सव मनाया जाता है।
3- भगवान गणेश ऐसे देवता हैं जो भौतिक और आध्यात्मिक दोनों तरह के फल देते हैं।
4- गणेश चतुर्थी की पूजा करने से व्यक्ति के 21 तरह के दुखों का नाश होता है।
5- भगवान गणेश को दूर्वा बहुत ही प्रिय होती है। दूर्वा चढ़ाने से हर किसी की मनोकामना पूरी होती है।
6- भगवान गणेश का वाहन चूहा है और बैठे रहने की आदत है।
7- किसी भी शुभ कार्य में सबसे पहले पूजा भगवान गणेश की होती है।
8- चतुर्थी तिथि, स्वस्तिक का चिन्ह, मोदक और लाल रंग के फूल इन्हें बहुत ही प्रिय होता है।
9- पूर्व की दिशा और लेखन में भगवान गणेश की रुचि है।
10- मनोकामनों की पूर्ति भगवान गणेश बहुत ही जल्दी करते हैं।
11- गणों के स्वामी होने के कारण उनका नाम गणपति है।
12- ज्योतिष में गणेश केतु का देवता माना जाता है।
13 - गणेश जी 12 नाम प्रमुख हैं सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लंबोदर, विकट, विघ्न-नाश, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचंद्र, गजानन
14- गणेश जी के पिता- भगवान शंकर, माता- भगवती पार्वती, भाई- श्री कार्तिकेय (बड़े भाई), बहन- -अशोकसुन्दरी, पत्नी- ऋद्धि और सिद्धि, पुत्र दो शुभ और लाभ
विज्ञापन
15- गणेश चतुर्थी उत्सव शिवाजी के समय में एक सार्वजनिक समारोह के रूप में मनाया जाता था।