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गज लक्ष्मी
राकेश/इंटरनेट डेस्क।
Updated Sat, 10 Nov 2012 01:04 PM IST
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गजलक्ष्मी यह लक्ष्मी का चार भुजाधारी स्वरूप है। नाम के मुताबिक ही यह गज यानी हाथी पर आठ कमल की पत्तियों के समान आकार वाले सिंहासन विराजित होती है। इनके दोनों ओर भी हाथी खड़े होते हैं। चार हाथों में कमल का फूल, अमृत कलश, बेल और शंख होता हैं। इनकी उपासना संपत्ति और संतान देने वाली मानी गई है।
गज को वर्षा करने वाले मेघों तथा उर्वरता का भी प्रतीक माना जाता है। गज की सवारी करने के कारण यह उर्वरता तथा समृद्धि की देवी भी हैं। गज लक्ष्मी देवी को राजलक्ष्मी के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इन्हीं की कृपा से राजाओं को धन वैभव और समृद्घि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
मध्यप्रदेश के नई पेठ में महालक्ष्मी देवी का मंदिर है। इस मंदिर में सफेद हाथी पर माता महालक्ष्मी विराजमान हैं। माना जाता है कि यह राजा विक्रमादित्य की राज लक्ष्मी हैं।
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गज को वर्षा करने वाले मेघों तथा उर्वरता का भी प्रतीक माना जाता है। गज की सवारी करने के कारण यह उर्वरता तथा समृद्धि की देवी भी हैं। गज लक्ष्मी देवी को राजलक्ष्मी के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इन्हीं की कृपा से राजाओं को धन वैभव और समृद्घि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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मध्यप्रदेश के नई पेठ में महालक्ष्मी देवी का मंदिर है। इस मंदिर में सफेद हाथी पर माता महालक्ष्मी विराजमान हैं। माना जाता है कि यह राजा विक्रमादित्य की राज लक्ष्मी हैं।
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