ऋषि पंचमी का उपवास देता है सभी पापों से मुक्ति जाने उपवास विधि
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हिन्दू धर्म में ऋषि पंचमी एक शुभ त्योहार है। मान्यता अनुसार यह दिन विशेष रूप से भारत के ऋषियों का सम्मान करने के लिए हैं। ऋषि पंचमी का शुभ अवसर मुख्य रूप से सप्तऋषियों को समर्पित है।धार्मिक कथाओं के अनुसार ये सात ऋषि है , वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र और भारद्वाज। भाद्रपद महीने में शुक्ल पक्ष की पंचमी तीथि को यह शुभ दिन आता है। इस वर्ष यह शुभ दिन 3 सिंतबर को है। ऋषि पंचमी का उपवास रखने वाले व्यक्ति का भाग्य पल भर मे बदल जाता है और पिछले व वर्तमान जीवन के सभी प्रकार के पापों से मुक्ति भी मिल जाती है।
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व्रत कथा
उत्तरा नाम का एक ब्राह्मण था जो सुशीला नाम की अपनी पत्नी के साथ रहता था। उनकी बेटी विधवा हो गयी थी इस कारण उनके साथ ही रहती थी। एक रात को बेटी के सम्पूर्ण शरीर को चींटियां लग गईं। माता-पिता चिंता मे डूब गए । उन्होंने एक ऋषि को इस बारे में बताया। तब ऋषि ने बताया कि उनकी बेटी ने पूर्व जन्म में रजस्वला काल मे पाप किया था। जिसका दंड उसे अब उसके शरीर पर चीटियां लग कर मिल रहा है । ऋषि ने पापो की मुक्ति के लिए उस ब्राह्मण कन्या को ऋषि पंचमी का व्रत करने की सलाह दी।
ब्राह्मण कन्या के व्रत करने से उसके सारे कष्ट दूर हो गए सभी पापो से मुक्ति मिल गयी और अगले जन्म में सौभाग्य की प्राप्ति हुई।
पूजा विधि
ऋषि पंचमी के दिन घर में साफ-सफाई करे। पूजा घर मे भी विशेष सफाई करवाए। विधि विधान से सात ऋषियों के साथ देवी अरुंधती की स्थापना करे।सप्त ऋषियों की हल्दी, चंदन, पुष्प, अक्षत आदि से पूजा करे। पूरे विधि-विधान से पूजा करने के बाद ऋषि पंचमी व्रत कथा सुने तत्पश्चात पंडितों को भोजन करवाकर कर व्रत का उद्यापन करे ।
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