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अब चार महीने नहीं होंगे शादी और शुभ काम, क्योंकि अब होगा शिव जी का राज

Sun, 26 Jul 2015 03:07 PM IST
पं जयगोविंद शास्त्री/ ज्योतिषशास्त्री
पं जयगोविंद शास्त्री/ ज्योतिषशास्त्री Updated Sun, 26 Jul 2015 03:07 PM IST
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ekadashi devsayani chaturmas

श्रीविष्णु के अंश से उत्पन्न दिव्यशक्ति ′शयनी′ एकादशी के साथ ही संतों और श्रद्धालुजनों का फलदाई चातुर्मास व्रत पर्व भी शरू हो जाएगा। यह एकादशी इस वर्ष सोमवार 27 जुलाई को है। शास्त्रों के अनुसार इसदिन से विष्णु का एक स्वरूप अगले चार महीनों तक यानी (आषाढ़ शुक्ल 11 से कार्तिक शुक्ल 11तक) राजा बलि के यहां रहेगें और दूसरा क्षीरसागर में शयन करेंगे।

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शास्त्रों के नियम के अनुसार इस अवधि में मांगलिक कार्य जैसे शादी-विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत आदि होने बंद हो जाते हैं। क्योंकि विष्णु भगवान के सोने के बाद सृष्टि का पूरा कार्यभार शिव जी के पास आ जाएगा।
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चातुर्मास के दिनों में एकादशी की रात को जागते हुए ॐ नमो नारायण मंत्र से भगवान् नारायण की चतुर्भुज मूर्ति को पीले वस्त्र पहनाएं और मूर्ति के आकार के सुंदर पलंग पर लेटाकर पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराकर षोडशोपचार विधि से पूजन करें। इन मंत्रो से श्रीहरि की प्रार्थना करें।-′सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जगत्सुप्तम भवेदिदम। विबुद्धे त्वयि बुध्येत जगत्सर्वं चराचरम ।।
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अर्थात हे! जगन्नाथ आपके सो जाने पर संपूर्ण जगत सो जाता है, और आप के जागृत होने पर संपूर्ण चराचर जगत भी जागृत रहता है। इस निवेदन के साथ प्रणाम करें। इस बीच व्रती को गुड़ अथवा मिष्ठान का सेवन करने, सुगंधित पदार्थों का लेप करने से परहेज करना चाहिए। साधु संतों के लिए मौन रहकर भी यह व्रत करने का विधान है।


गृहस्थ को पुरुषसूक्त का पाठ करने या सुनने से सभी भौतिक वस्तुओं की प्राप्ति होती है। चातुर्यमास्य के मध्य झूठ बोलने, ठगी करने, दूसरे का अहित सोचने, बड़ों का अपमान करने से बचना चाहिए। इस प्रकार भक्त हरिशयनी एकादशी और चातुर्यमास के दिन श्रीविष्णु की पूजा करके जीवन मरण के बंधन से मुक्त होकर बैकुण्ठलोक को जाता है।

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