रोचक है भूकंप आने की यह है पौराणिक और धार्मिक कथाएं
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पौराणिक कथाओं में पृथ्वी को देवी के रूप में मान्यता प्राप्त है और इसे धरती माता कहा गया है। पृथ्वी को मंगल ग्रह की माता के रूप में जाना जाता है। इस संदर्भ में कथा है कि हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को समुद्र तल में पहुंचा दिया।
पृथ्वी को समुद्र तल से निकालने के लिए भगवान विष्णु ने वाराह अवतार लिया और हिरण्याक्ष का वध करके पृथ्वी को इस प्रकार स्थापित किया जिससे पृथ्वी पर जीवन का विकास हो सके।
पृथ्वी की प्रार्थना पर वराह भगवान कुछ समय तक पृथ्वी के साथ रहे और वराह भगवान से पृथ्वी को एक पुत्र की प्राप्ति हुई जो मंगल ग्रह कहलाया।
मंगल ग्रह को ज्योतिष ग्रंथों एवं पौराणिक कथाओं में क्रोधी और विनाशकारी ग्रह बताया गया है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार मंगल के अशुभ प्रभाव से भूकंप, आगजनी एवं कई तरह की तबाही आती है।
शेषनाग और भूकंप की मान्यता
लेकिन धार्मिक कथाओं में भूकंप के कई दूसरे कारण बताए गए हैं। हिन्दू पौराणिक कथाओं में ऐसी मान्यता है कि पृथ्वी का भार शेषनाग उठाते हैं। यानी पृथ्वी शेष नाग के सिर पर टिका हुआ है।
जब कभी शेषनाग करवट लेते हैं तो पृथ्वी हिल जाती है। लेकिन शेषनाग क्यों करवट लेते हैं इस विषय में धारण यह है कि जब कभी पृथ्वी पर पाप का भार बढ़ जाता है तो शेषनाग नाराज हो जाते हैं। इससे शेषनाग करवट लेकर धरती पर तबाही लाते हैं और लोगों को चेतावनी देते हैं कि पाप का भार कम करो यानी अर्धम के कार्यों से दूर रहो।
वास्तु विज्ञान के अनुसार पृथ्वी को शेषनाग और कछुआ यानी भगवान विष्णु के कच्छप अवतार ने संभालकर रखा हुआ है। इसलिए जब भी घर की नींव रखी जाती है तो नींव में सबसे नीचे चांदी का कछुआ और नाग रखा जाता है ताकि घर हमेशा अडिग रहे।
चीन जापान और यूनान में भूकंप की मान्यता
चीन में भूकंप की मान्यता हिन्दू धर्म की मान्यताओं से अलग है लेकिन काफी मायनों में यह मिलता जुलता है। चीन के लोग यह मानते हैं कि पृथ्वी को एक बड़े से मकड़े ने अपनी पीठ पर संभलकर रखा हुआ है।
जब यह मकड़ा अपनी पीठ हिलाता है तो पृथ्वी हिल जाती है और भूकंप आ जाता है। जापान में भी भूकंप को लेकर अजब सी मान्यता है। यहां ऐसी धारण है कि जमीन के नीचे नामजू नाम की एक मछली रहती है। जब कभी नामजू काशिमा नाम के देवता पर हमला करती है तो भूकंप आ जाता है।
यूनान में भूकंप की मान्यता कुछ कुछ काशी विश्वनाथ से मिलती जुलती है। जिस प्रकार हिन्दू धर्म में यह मान्यता है कि काशी शिव जी के त्रिशूल पर टिका हुआ है उसी प्रकार यूनान में यह माना जाता है कि पोजेडन नाम के देवता हैं जो समुद्र के स्वामी हैं। इनके हाथों में त्रिशूल है यह जब क्रोधित होते हैं तब अपना त्रिशूल जमीन पर मारते हैं इसकी चोट से धरती हिलने लगती है।