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Dussehra 2019: हर काम बना देते है श्री रामचरितमानस के मंत्र
Thu, 03 Oct 2019 06:28 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 03 Oct 2019 06:28 AM IST
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जीवन में कई बार ऐसे मोड़ आते हैं जहां पर हमारे लिए यह तय करना मुश्किल होता है कि क्या करें क्या नहीं। संकट के समय में जब कोई रास्ता नहीं दिखता है तो अंत में हम कठिन परिस्थितियों से बहार निकलने के लिए परमपिता परमेश्वर को याद करते हैं। आज हम आपको संकटो से बहार निकलने ले तमाम उपाय बताएंगे।
प्रभु श्रीराम से जुड़ी तमाम चौपाईयां न सिर्फ तमाम दु:खों और कष्ट से उबारने का काम करती हैं बल्कि सभी मनोकामनाओं को पूरा करती हैं। विजयदशमी के पावन पर्व पर रामचरितमानस की तमाम चौपाईयों में से किसी एक को मंत्र मानकर श्रद्धापूर्वक जपने से प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त होता है।
चौपाईयों को को सिद्ध करने का नियम
श्रीरामचरित मानस के दोहे-चौपाईयों को सिद्ध करने के लिए विजयादशमी के दिन स्नान—ध्यान करने के पश्चात् अष्टांग हवन के द्वारा सिद्ध करना चाहिये। इसके पश्चात् जिस कार्य के लिये मानस का दिव्य मन्त्र आप सिद्ध कर रहें हों, उसके लिए नित्य एक माला जप अवश्य करें।
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श्रीरामचरितमानस के सिद्ध मंत्र
यात्रा की सफलता के लिए
प्रबिसि नगर कीजै सब काजा। ह्रदय राखि कोसलपुर राजा।।
संपत्ति की प्राप्ति के लिए
जे सकाम नर सुनहि जे गावहि। सुख संपत्ति नाना विधि पावहि।।
किसी भी संकट को दूर करने के लिए
दीनदयाल बिरिदु सम्भारी। हरहु नाथ मम संकट भारी।
मुकदमा जीतने के लिए
पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना।।
परस्पर प्रेम बढ़ाने के लिए
सब नर करहिं परस्पर प्रीती। चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती॥
शीघ्र विवाह के लिए
तब जन पाई बसिष्ठ आयसु ब्याह। साज सँवारि कै।।
मांडवी, श्रुतकी, रति, उर्मिला कुँअरि लई हंकारि कै।।
रोजगार पाने के लिए
विस्व भरण पोषण कर जोई। ताकर नाम भरत जस होई।।
विद्या प्राप्ति के लिए
गुरु गृहँ गए पढ़न रघुराई। अलप काल विद्या सब आई॥
परीक्षा में सफलता के लिए
जेहि पर कृपा करहिं जनु जानी। कबि उर अजिर नचावहिं बानी॥
मोरि सुधारिहि सो सब भाँती। जासु कृपा नहिं कृपाँ अघाती॥
पुत्र प्राप्ति के लिए
प्रेम मगन कौसल्या निसिदिन जात न जान।
सुत सनेह बस माता बाल चरित कर गान।।
आलस्य से मुक्ति पाने के लिए
हनुमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह प्रणाम।
राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहां विश्राम।।
सभी मनोरथ को पूरा करने के लिए
भव भेषज रघुनाथ जसु,सुनहि जे नर अरू नारि।
तिन्ह कर सकल मनोरथ सिद्ध करहि त्रिसिरारि।।
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प्रभु श्रीराम से जुड़ी तमाम चौपाईयां न सिर्फ तमाम दु:खों और कष्ट से उबारने का काम करती हैं बल्कि सभी मनोकामनाओं को पूरा करती हैं। विजयदशमी के पावन पर्व पर रामचरितमानस की तमाम चौपाईयों में से किसी एक को मंत्र मानकर श्रद्धापूर्वक जपने से प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त होता है।
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चौपाईयों को को सिद्ध करने का नियम
श्रीरामचरित मानस के दोहे-चौपाईयों को सिद्ध करने के लिए विजयादशमी के दिन स्नान—ध्यान करने के पश्चात् अष्टांग हवन के द्वारा सिद्ध करना चाहिये। इसके पश्चात् जिस कार्य के लिये मानस का दिव्य मन्त्र आप सिद्ध कर रहें हों, उसके लिए नित्य एक माला जप अवश्य करें।
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श्रीरामचरितमानस के सिद्ध मंत्र
यात्रा की सफलता के लिए
प्रबिसि नगर कीजै सब काजा। ह्रदय राखि कोसलपुर राजा।।
संपत्ति की प्राप्ति के लिए
जे सकाम नर सुनहि जे गावहि। सुख संपत्ति नाना विधि पावहि।।
किसी भी संकट को दूर करने के लिए
दीनदयाल बिरिदु सम्भारी। हरहु नाथ मम संकट भारी।
मुकदमा जीतने के लिए
पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना।।
परस्पर प्रेम बढ़ाने के लिए
सब नर करहिं परस्पर प्रीती। चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती॥
शीघ्र विवाह के लिए
तब जन पाई बसिष्ठ आयसु ब्याह। साज सँवारि कै।।
मांडवी, श्रुतकी, रति, उर्मिला कुँअरि लई हंकारि कै।।
रोजगार पाने के लिए
विस्व भरण पोषण कर जोई। ताकर नाम भरत जस होई।।
विद्या प्राप्ति के लिए
गुरु गृहँ गए पढ़न रघुराई। अलप काल विद्या सब आई॥
परीक्षा में सफलता के लिए
जेहि पर कृपा करहिं जनु जानी। कबि उर अजिर नचावहिं बानी॥
मोरि सुधारिहि सो सब भाँती। जासु कृपा नहिं कृपाँ अघाती॥
पुत्र प्राप्ति के लिए
प्रेम मगन कौसल्या निसिदिन जात न जान।
सुत सनेह बस माता बाल चरित कर गान।।
आलस्य से मुक्ति पाने के लिए
हनुमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह प्रणाम।
राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहां विश्राम।।
सभी मनोरथ को पूरा करने के लिए
भव भेषज रघुनाथ जसु,सुनहि जे नर अरू नारि।
तिन्ह कर सकल मनोरथ सिद्ध करहि त्रिसिरारि।।