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Chaturmas 2021 Start Date: 20 जुलाई से चातुर्मास प्रारंभ, जाने नियम और सावधानियां

Tue, 13 Jul 2021 09:34 PM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Tue, 13 Jul 2021 09:34 PM IST
सार

चातुर्मास में जगत के पालनहार विष्णु जी की अनुपस्थिति के कारण चातुर्मास में विवाह या अन्य संस्कार, गृह प्रवेश जैसे अन्य मांगलिक कार्य रुक जाते हैं।

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Chaturmas 2021 Start Date: 20 जुलाई से चातुर्मास प्रारंभ, जाने नियम और सावधानियां
चातुर्मास 2021 - फोटो : Social Media

विस्तार

Chaturmas 2021 Start Date: चातुर्मास 20 जुलाई से प्रारंभ हो रहा है और यह 14 नवंबर 2021 तक रहेगी। हिन्दू धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व होता है। चातुर्मास से आशय चार माह (श्रावण, भाद्रपद, अश्विन, कार्तिक) से है। चातुर्मास आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष एकादशी से प्रारंभ होकर, कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को समाप्त होता है। चातुर्मास में मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। चातुर्मास का समय साधना के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। हालांकि साधना के संचरण नहीं किया जाना चाहिए। बल्कि एक स्थान पर ही बैठकर साधना करनी चाहिए। इन चार महीनों में सावन का महीना सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। इस माह में जो व्यक्ति भागवत कथा, भगवान शिव का पूजन, धार्मिक अनुष्ठान, दान करेगा उसे अक्षय पुण्य प्राप्त होगा।

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धार्मिक दृष्टिकोण से चातुर्मास
धार्मिक दृष्टिकोण से चातुर्मास का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि चातुर्मास में भगवान विष्णु पाताल लोक में चार महीने के लिए विश्राम करते हैं। ऐसे में सृष्टि के संचालन का कार्यभार भगवान शिव संभालते हैं। चतुर्मास में ही भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना सावन आता है। जगत के पालनहार विष्णु जी की अनुपस्थिति के कारण चातुर्मास में विवाह या अन्य संस्कार, गृह प्रवेश जैसे अन्य मांगलिक कार्य रुक जाते हैं। वहीं जब कार्तिक शुक्ल की एकादशी जिसे देवोत्थान एकादशी कहते हैं आती है तब भगवान विष्णु जागते हैं और फिर पुनः शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है।
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चातुर्मास में बरतें ये सावधानियां
चातुर्मास जिसमें सावन, भादौ, आश्विन और कार्तिक का माह आते हैं इन चार माह में खान-पान और व्रत के नियम और संयम का पालन करना चाहिए। दरअसल इन 4 महीनों में व्यक्ति की पाचनशक्ति कमजोर हो जाती है। इससे अलावा भोजन और जल में बैक्टीरिया की तादाद भी बढ़ जाती है। इस समय पानी को ऊबालकर पीना ज्यादा लाभकारी होता है। 

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