नवरात्रि के नौ दिन उपवास से बढ़ेगी आपकी ऊर्जा, इन बातों का रखें ध्यान...
नवरात्रों में उपवास करने से शारीरिक और मानसिक ऊर्जा के स्तर में वृद्धि होती है। इससे मन की अस्वस्थता दूर हो जाती है और सजगता और आनंद बढ़ता है।
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सनातन धर्म में मानव जीवन के लक्ष्य भौतिक सुख तथा आध्यात्मिक आनंद की प्राप्ति के लिए अनेक देवी -देवताओं की पूजा -अर्चना का विधान है, जिनमें माँ दुर्गा शक्ति की उपासना प्रमुख है। शास्त्रों में दुर्गा अर्थात शक्ति को "रक्षक " कहकर पुकारा गया है। माँ शक्ति की उपासना कर, हर कोई मनुष्य अपार शक्ति एवं सामर्थ्य अर्जित कर सकता है। कुछ ही दिनों में नवरात्र शुरू होने वाले हैं ,पूरा वातावरण भक्तिमय हो चुका है।अपनी मनोकामना पूरी करने और देवी माँ को खुश करने के लिए लोग व्रत रखते हैं। ऐसे में कुछ श्रद्धालु प्रथम और अंतिम दिन का व्रत रखते हैं जबकि कई भक्त पूरे नवरात्र का व्रत करते हैं।
नवरात्रों में देवी भगवती की उपासना, व्रत सामूहिक रूप से करे जाएँ तो भक्तजनों को संपूर्ण आनंद की प्राप्ति होती है। ऐसा करने से मनुष्य के अंदर छल,कपट ,द्वेष, ईर्ष्या, क्रोध आदि पर नियंत्रण हो जाता है। नवरात्रों में उपवास करने से शारीरिक और मानसिक ऊर्जा के स्तर में वृद्धि होती है। इससे मन की अस्वस्थता दूर हो जाती है और सजगता और आनंद बढ़ता है। नवरात्र का समय परिवर्तन का ऐसा समय होता है, जिसमें शरीर -मन की बढ़ी संवेदनशीलता को उपवास और साधना द्वारा हम आत्मविकास में न्योजित कर सकते हैं।
उपवास में कैसा हो खान-पान
अब सवाल यह उठता है कि व्रत में खान- पान किस प्रकार का होना चाहिए ताकि व्रत करने से स्वास्थ्य पर कोई विपरीत प्रभाव ना पड़े। विज्ञान का मानना है कि इस बदलते मौसम में हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता अपने आप कमज़ोर हो जाती है इसलिए उपवास के माध्यम से आप हल्का व सुपाच्य आहार लेकर अपने शरीर व मन दोनों को नयी ऊर्जा से भर सकते हैं। उपवास के दौरान विषैले तत्वों का जमाव बंद हो जाता है और शरीर में पहले से जमे हुए विषैले तत्व तेज़ी से बाहर निकलने लगते हैं यही शरीर का "डिटॉक्सीफिकेशन " कहलाता है। इससे शरीर चुस्त -दुरुस्त और हल्का लगने लगता है। निराहार, फलाहार या मितहार रहकर नवरात्र का व्रत रखने की परंपरा सनातन धर्म में रही है। निरहार में केवल पानी और एक जोड़ा लौंग का प्रावधान है। फलाहार की तहत एक समय फलाहारी वस्तुओं को अपने भोजन में शामिल किया जा सकता है। तथा मितहारी में शुद्ध और शाकाहारी भोजन एक ही समय करने का विधान है।
उपवास के दौरान जितनी अधिक मात्रा में ले सकें, पेय पदार्थ लें। इनमें पानी , जूस , मट्ठा ,लस्सी , नारियल पानी , नींबू पानी के साथ दूध आदि भी लें। तरल की सही मात्रा शरीर को हल्का रखेगी ही , आवश्यक मिनरल्स व विटामिंस के ज़रिये ऊर्जा भी देती रहेगी , जिससे आप थकावट व आलस भी अनुभव नहीं करेंगे और डिहाइड्रेशन की समस्या से भी बचे रहेंगे। हल्के ठोस आहार के रूप में आप सेंधानमक वाली साबूदाने की खिचड़ी का प्रयोग कर सकते हैं ।
कार्बोहाइड्रेट से भरपूर साबूदाना तुरंत ऊर्जा देने में सक्षम है। बीच -बीच में खाने के लिए फलों की चाट फायदेमंद है , फलों में हैल्दी शुगर फ्रुक्टोज़ के साथ मेटाबॉलिज़्म को तेज़ करने की क्षमता होती है । दिनभर में अलग -अलग फलों का सेवन करें क्योंकि फलों में कैलोरीज़ कम होती हैं और इनमें कार्बोहाइड्रेटऔर फाइबर प्रचुर मात्रा में होते हैं। सेब ,अनार , केला, पपीता , खजूर का सेवन करें। इसके साथ ही लौकी , परवल व उबले आलू का प्रयोग फलाहार के रूप में कर सकते हैं ,दूध से बनी हुई चीज़ें उपवास में विशेष रूप से खाएं , पनीर भला किसे पसंद नहीं होगा। अगर पसंद ना हो तो भी खाइये , क्योंकि यह कैल्शियम से भरपूर , आसानी से पचने वाला हल्का खाद्य पदार्थ होता हैं। व्रत में कूटू , सिंघाड़े के आटे की रोटी बनाकर हरी चटनी के साथ खाने का आनंद लें।
याद रहे व्रत के दौरान तला -भुना खाने से बचें। हाई कैलोरी युक्त भोजन करने से आपके बीमार होने की संभावना बढ़ जाती है और साथ ही मोटापा भी बढ़ेगा। तले नमकीन और पकोड़े खाने की बजाय रोस्टेड मखाने का प्रयोग ही करें। आप रोज़मर्रा से अलग संतुलित और नियंत्रित ,पौष्टिक और हल्का खाना खाएंगे तो शरीर और मन दोनों को नयी ऊर्जा मिलेगी। इस बात का ज़रूर ध्यान रखें कि उपवास में खाने के बीच लंबा अंतराल ना रहे , इस नवरात्र के मौके पर उपवास को अपनी ताकत बनाएं , न की सेहत का दुश्मन।