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जिस दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि निर्माण का काम शुरू किया
राकेश/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sat, 29 Mar 2014 08:58 AM IST
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देवी पुराण में बताया गया है कि सृष्टि के आरंभ से पहले संपूर्ण ब्रह्माण्ड में अंधकार का साम्राज्य था। उस समय आदि शक्ति के मन में सृष्टि के निर्माण की इच्छा प्रकट हुई।
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आदिशक्ति, देवी कुष्मांडा के रूप में पूर्व सृष्टि के अंत से पहले ही वनस्पतियों एवं सृष्टि की रचना के लिए जरूरी चीजों को संभालकर सूर्य मण्डल के बीच में विराजमान थी। सृष्टि रचना का जब समय आया तब इन्होंने ब्रह्मा विष्णु एवं भगवान शिव को प्रकट किया।
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इसके बाद सत्, रज और तम गुणों से तीन देवियां देवी से उत्पन्न हुई जो सरस्वती, लक्ष्मी और काली कहलायी। सृष्टि चलाने में सहायता प्रदान करने के लिए आदि शक्ति ने ब्रह्मा जी को सरस्वती, विष्णु को लक्ष्मी एवं शिव जी को देवी काली सौंप दी।
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आदि शक्ति की कृपा से ब्रह्मा जी सृष्टि के रचयिता बने, विष्णु पालनकर्ता और शिव संहारकर्ता। शास्त्रों के अनुसार जिस दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि निर्माण काम शुरु किया उस दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि थी। इसलिए संवत् की शुरुआत और नए वर्ष का आरंभ इसी दिन से माना जाता है।
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देवी की कृपा से ब्रह्मा जी सृष्टि निर्माण का काम पूरा करने में सफल हुए इसलिए सृष्टि के आरंभ की तिथि के दिन से नौ दिनों तक आदिशक्ति के नौ रूपों की पूजा होती है। नवरात्र पूजा के साथ देवी से कामना की जाती है कि जिस तरह सृष्टि निर्माण का कार्य सफल हुआ उसी प्रकार नया संवत् भी सफल और सुखद रहे।