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Budha Purnima 2020: सिद्धार्थ से भगवान बुद्ध बनने की कहानी, बुद्ध के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाएं
Thu, 07 May 2020 12:32 AM IST
रुस्तम राणा
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: रुस्तम राणा
Updated Thu, 07 May 2020 12:32 AM IST
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Budha Purnima 2020
- फोटो : Pixabay
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Budha Purnima 2020: बुद्ध पूर्णिमा भगवान गौतम बुद्ध का जन्मोत्सव है। भगवान बुद्ध ने ही बौद्ध धर्म की स्थापना की थी, जो आज विश्व का एक प्रमुख धर्म है। इस धर्म के मानने वाले दक्षिण पूर्व एशिया के अधिकांश भागों में रहते हैं। बौद्ध धर्म की उत्पत्ति सिद्धार्थ की कहानी से जुड़ी है, जिन्हें भगवान बुद्ध के नाम से जाना जाता है। बौद्ध धर्म में परंपराओं, धारणाओं और प्रथाओं का श्रेय भगवान बुद्ध को दिया जाता है। आइए जानते हैं भगवान बुध का जीवन परिचय।
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कब है बुध पूर्णिमा
Budha Purnima 2020 Date: हिन्दू पंचांग के अनुसार, वैशाख पूर्णिमा के दिन भगवान बुध लुंबनि (नेपाल) नामक स्थान पर जन्म लिया था। इस वर्ष यह तिथि 7 मई को है। अतः बुद्ध पूर्णिमा उत्सव 7 मई को मनाया जाएगा।
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भगवान बुद्ध के जीवन की मूल बातें
भगवान बुध का जन्म 563 ईसा पूर्व में हुआ था। उनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था। उनकी माता नाम माया और पिता का नाम शुद्धोधन था। वे शाक्य वंश के क्षत्रिय राजवंश से थे। सिद्धार्थ का विवाह राजकुमारी यशोधरा के साथ हुआ था। उनका एक पुत्र जिसका नाम राहुल था। 29 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने घोड़े कंथक पर सवार होकर अपने सारथी चन्ना के साथ सत्य की खोज के लिए निकल पड़े।
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सत्य की खोज में छह वर्षों तक भिक्षुक बनकर भटकते रहे। इसके बाद उन्हें गया (बिहार) में एक पीपल के वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ। यहां उन्हें सत्य की अनुभूति अर्थात निर्वाण की प्राप्ति हुई और वे सिद्धार्थ से बुध बन गए। निर्वाण प्राप्ति के बाद उन्होंने सारनाथ (वाराणसी के निकट) में अपने पांच साथियों को पहला प्रवचन दिया। इतिहास में इस घटना को धर्मचक्र परिवर्तन के नाम से जाना जाता है।
भगवान बुध को महानिर्वाण उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में 80 वर्ष की आयु में प्राप्त हुआ। कहा जाता है कि उनके जीवन का अधिकांश भाग राजा बिम्बिसार के समकालीन और अंतिम वर्ष हर्यंक वंश के अजातशत्रु के समकालीन माना जाता है। अनेक बौद्ध ग्रंथों में बुध को तथागत और शाक्यमुनि के नाम से जाना जाता है।