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अनंत पूजा आज: अनंत सूत्र के महत्व को जानकर हैरान रह जाएंगे?
टीम डिजिटल
Updated Wed, 18 Sep 2013 11:13 AM IST
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आज अनंत पूजा है। अनंत भगवान ने सृष्टि के आरंभ में चैदह लोकों 'तल, अतल, वितल, सुतल, तलातल, रसातल, पाताल, भू, भुवः, स्वः, जन, तप, सत्य, मह' की रचना की थी। इन लोकों का पालन करने के लिए वह स्वयं भी 14 रूपों में प्रकट हो गए जिससे अनंत प्रतीत होने लगे।
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इसलिए अनंत पूजा के दिन एक पात्र में दूध, शहद, दही, घी और गंगाजल मिलाकर क्षीर सागर का निर्माण किया जाता है। फिर कच्चे धागों से बने चैदह गांठों वाले अनंत सूत्र से भगवान अनंत को क्षीर सागर में ढूंढ़ते हैं। पूजा के पश्चात इसी धागे को अनंत भगवान का स्वरूप मानकर पुरूष दाएं बाजू पर बांधते हैं और महिलाएं बाएं बाजू पर अनंत को धारण करती हैं।
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अनंत के चैदह गांठों में प्रत्येक गांठ एक एक लोक का प्रतीक होता है जिसकी रचना भगवान विष्णु ने की है। इन प्रत्येक गांठों में भगवान के उन चैदह रूपों का वास माना जाता है जो चौदह लोकों में वास करते हैं।
शास्त्रों के अनुसार उपनयन संस्कार के बाद ही 14 गांठों वाला अनंत किसी पुरूष को धारण करना चाहिए। महिलाओं को विवाह के बाद 14 गांठों वाला अनंत धारण करने के लिए कहा गया है। इससे पहले तेरह गांठों वाला अनंत धारण करणा चाहिए। तेरह गांठों वाले अनंत को फनंत नाम से जाना जाता है।
अनंत धारण करने वालों के लिए नियम
अनंत सूत्र भगवान विष्णु का प्रतीक होता है। इसलिए जो व्यक्ति इसे धारण करता है उसे मन, कर्म और वचन से वैष्णव होना चाहिए। वैष्णव होने से अर्थ है व्यक्ति को झूठ, परनिंदा एवं मांस-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। जो व्यक्ति इस नियम का पालन नहीं करते हैं उन्हें अनंत धारण करने का पुण्य फल नहीं मिलता है।
इस सूत्र को धारण करने वालों के लिए दूसरा नियम यह है कि इसे पूरे वर्ष धारण करें और अनंत पूजा के दिन नया अनंत धारण करते समय पुराने अनंत को विसर्जित करें। जो व्यक्ति पूरे वर्ष धारण नहीं कर सकते उन्हें 14 दिनों बाद अनंत को प्रणाम करके किसी नदी में विसर्जित कर देना चाहिए।
अनंत सूत्र की कथा
एक बार कौण्डिल्य मुनि की पत्नी शीला ने सुख-संपत्ति की इच्छा से अनंत चतुर्दशी का व्रत रखा। इसके बाद अनन्त सूत्र को अपने बाएं हाथ में बांध लिया। भगवान अनन्त की कृपा से शीला धन-धान्य संपन्न हो गई। एक दिन कौण्डिल्य मुनि की नज़र शीला के बाजू पर बंधे अनंत सूत्र पड़ गई।
कौण्डिल्य मुनि को लगा कि यह कोई जादू-टोने का धागा है और उसे तोड़कर आग में फेंक दिया। इससे अनंत भगवान नाराज हो गाए। कुछ ही दिन में कौण्डिय मुनि और शीला फिर से गरीब हो गए। शीला ने बताया कि आपने अनंत सूत्र को तोड़कर जला दिया है इसलिए ही हमें गरीबी के दिन देखने पड़ रहे हैं। शीला की बात सुनकर कौण्डिल्य मुनि को अपने किए पर पछताबा होने लगा।
कौण्डिल्य मुनि अनंत भगवान से माफी मांगने लगे। एक दिन गरीब ब्राह्मण के वेष में अनंत भगवान कौण्डिल्य मुनि के आश्रम में पधारे और मुनि से कहा कि आप पत्नी समेत अनंत भगवान की पूजा करें इससे आपकी गरीबी दूर हो जाएगी।
ब्राह्मण की आज्ञा मानकर मुनि ने पत्नी समेत अनंत भगवान का व्रत किया और अनंत सूत्र बाजू पर बांधा जिससे उनकी गरीबी समाप्त हो गई। इस व्रत का नियम है कि व्रती को खाने में नमक का प्रयोग नहीं करना चाहिए।