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भगवान विष्णु के इस व्रत में आंवले की पूजा क्यों होती है?

Sun, 01 Mar 2015 08:51 AM IST
राकेश झा/टीम डिजिटल
राकेश झा/टीम डिजिटल Updated Sun, 01 Mar 2015 08:51 AM IST
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amlaki ekadashi vrat katha

मार्च महीने की शुरुआत भगवान विष्णु के व्रत से हो रहा है क्योंकि इस वर्ष आमलकी एकादशी 1 मार्च को आया है। शास्त्रों के अनुसार यह एकादशी हर साल फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। शास्त्रों में इस एकादशी को अक्षय नवमी के समान है शुभ फलदायी बताया गया है।

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जिस तरह अक्षय नवमी में आंवले के वृक्ष की पूजा होती है उसी प्रकार आमलकी एकादशी के दिन आंवले की वृक्ष के नीचे भगवान विष्णु की पूजा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
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आवले की पूजा क्यों होती है?
आध्यात्मिक विषयों के जानकार 'पण्डित जयगोविंद शास्त्री' बताते हैं कि अमालकी एकादशी के दिन आंवले की पूजा का महत्व इसलिए है क्योंकि इसी दिन सृष्टि के आरंभ में आंवले के वृक्ष की उत्पत्ति हुई थी।
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इस संदर्भ में कथा है कि विष्णु की नाभि से उत्पन्न होने के बाद ब्रह्मा जी के मन में जिज्ञासा हुई कि वह कौन हैं, उनकी उत्पत्ति कैसे हुई।

इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए ब्रह्मा जी परब्रह्म की तपस्या करने लगे। ब्रह्म जी की तपस्या से प्रश्न होकर परब्रह्म भगवान विष्णु प्रकट हुए। विष्णु को सामने देखकर ब्रह्मा जी खुशी से रोने लगे।

इनके आंसू भगवान विष्णु के चरणों पर गिरने लगे। ब्रह्मा जी की इस प्रकार भक्ति भावना देखकर भगवान विष्णु प्रसन्न हुए। और ब्रह्मा जी के आंसूओं से आमलकी यानी आंवले का वृक्ष उत्पन्न हुआ।

भगवान विष्णु ने ब्रह्मा जी से कहा कि आपके आंसूओं से उत्पन्न आंवले का वृक्ष और फल मुझे अति प्रिय रहेगा। जो भी आमलकी एकादशी के दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करेगा उसके सारे पाप समाप्त हो जाएंगे और व्यक्ति मोक्ष प्राप्ति का अधिकारी होगा।


आमलकी एकादशी व्रत विधिः
एकादशी के दिन प्रातः स्नानादि से निवृत होकर भगवान विष्णु एवं आंवले के वृक्ष की पूजा करें। अगर आंवले का वृक्ष उपलब्ध नहीं हो तो आंवले का फल भगवान विष्णु को प्रसाद स्वरूप अर्पित करें।

घी का दीपक जलकार विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। जो लोग व्रत नहीं करते हैं वह भी इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु को आंवला अर्पित करें और स्वयं खाएं भी।

शास्त्रों के अनुसार आमलकी एकादशी के दिन आंवले का सेवन भी पाप का नाश करता है।

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